ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में!

सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में,
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है|

राहत इन्दौरी

ज़ाती मकान थोड़ी है!

जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे,
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है|

राहत इन्दौरी

तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है!

हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है,
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है|

राहत इन्दौरी

हथेली पे जान थोड़ी है!

मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन,
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है|

राहत इन्दौरी

सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है!

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में,
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है|

राहत इन्दौरी

कोई आसमान थोड़ी है!

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है,
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है|

राहत इन्दौरी

काएँ-काएँ करने लगे!

अजीब रंग था मजलिस का, ख़ूब महफ़िल थी,
सफ़ेद पोश उठे काएँ-काएँ करने लगे|

राहत इन्दौरी

झुलस रहे हैं यहाँ छाँव बाँटने वाले!

झुलस रहे हैं यहाँ छाँव बाँटने वाले,
वो धूप है कि शजर इलतिजाएँ करने लगे|

राहत इन्दौरी

फ़रिश्ते ख़ताएँ करने लगे!

ज़मीं पे आ गए आँखों से टूट कर आँसू,
बुरी ख़बर है फ़रिश्ते ख़ताएँ करने लगे|

राहत इन्दौरी

हवाएँ करने लगे!

लहूलोहान पड़ा था ज़मीं पे इक सूरज,
परिन्दे अपने परों से हवाएँ करने लगे|

राहत इन्दौरी