मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे!

तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर,
ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे|

राहत इन्दौरी

हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे!

अँधेरे चारों तरफ़ सायं-सायं करने लगे,
चिराग़ हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे|

राहत इन्दौरी

यहीं आके फिसलते क्यों हैं!

मोड़ होता है जवानी का संभलने के लिए,
और सब लोग यहीं आके फिसलते क्यों हैं|

राहत इन्दौरी

मेरी छत पे टहलते क्यों हैं!

नींद से मेरा त’अल्लुक़ ही नहीं बरसों से,
ख्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं|

राहत इन्दौरी

मेरे नाम से जलते क्यों हैं!

मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ,
रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं|

राहत इन्दौरी

घर से निकलते क्यों हैं!

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं,
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं|

राहत इन्दौरी

पैमाना कि दिल है मेरा!

जाने क्या टूटा है पैमाना कि दिल है मेरा,
बिखरे-बिखरे हैं खयालात मुझे होश नहीं|

राहत इन्दौरी

देखी थी बरसात मुझे होश नहीं!

आँसुओं और शराबों में गुजारी है हयात,
मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं|

राहत इन्दौरी

नहीं मालूम कि जाना है कहाँ!

मुझको ये भी नहीं मालूम कि जाना है कहाँ,
थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं|

राहत इन्दौरी

कैसे कटी रात मुझे होश नहीं!

कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं,
रात के साथ गई बात मुझे होश नहीं|

राहत इन्दौरी