मेरे पर निकलने लगते हैं!

बुलन्दियों का तसव्वुर भी ख़ूब होता है,
कभी कभी तो मेरे पर निकलने लगते हैं|

राहत इन्दौरी

बचकर निकलने लगते हैं!

बुरे दिनों से बचाना मुझे मेरे मौला,
क़रीबी दोस्त भी बचकर निकलने लगते हैं|

राहत इन्दौरी

धूप पहनकर निकलने लगते हैं!

हसीन लगते हैं जाड़ों में सुबह के मंज़र,
सितारे धूप पहनकर निकलने लगते हैं|

राहत इन्दौरी

घर निकलने लगते हैं!

पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं,
ज़मीं जहाँ भी खुले घर निकलने लगते हैं|

राहत इन्दौरी

चाँद-सितारों का है मौला खैर!

और क़यामत मेरे चराग़ों पर टूटी,
झगड़ा चाँद-सितारों का है मौला खैर|

राहत इन्दौरी

दुनियादारों का है मौला खैर!

दुनिया से बाहर भी निकलकर देख चुके,
सब कुछ दुनियादारों का है मौला खैर|

राहत इन्दौरी

रिश्तेदारों का है मौला खैर!

इस दुनिया में तेरे बाद मेरे सर पर,
साया रिश्तेदारों का है मौला खैर|

राहत इन्दौरी

यारों का है मौला खैर!

दुश्मन से तो टक्कर ली है सौ-सौ बार,
सामना अबके यारों का है मौला खैर|

राहत इन्दौरी

बोझ अँधियारों का है मौला खैर!

सर पर बोझ अँधियारों का है मौला खैर,
और सफ़र कोहसारों का है मौला खैर|

राहत इन्दौरी

सफारी पहन के आते हैं!

इबादतों की हिफाज़त भी उनके जिम्मे है,
जो मस्जिदों में सफारी पहन के आते हैं।

राहत इन्दौरी