ऐसा ही ये मंज़र बोलते हैं!

नया इक हादिसा होने को है फिर,
कुछ ऐसा ही ये मंज़र बोलते हैं|

राजेश रेड्डी

राहों के पत्थर बोलते हैं!

तेरे हमराह मंज़िल तक चलेंगे,
मेरी राहों के पत्थर बोलते हैं|

राजेश रेड्डी

दुनिया कभी घर बोलते हैं!

सराये है जिसे नादां मुसाफ़िर,
कभी दुनिया कभी घर बोलते हैं|

राजेश रेड्डी

टूटे हुए पर बोलते हैं!

मेरी परवाज़ की सारी कहानी,
मेरे टूटे हुए पर बोलते हैं|

राजेश रेड्डी

बस्ती में ख़ंजर बोलते हैं!

ज़ुबां ख़ामोश है डर बोलते हैं,
अब इस बस्ती में ख़ंजर बोलते हैं|

राजेश रेड्डी

दोस्तों की दोस्ती है सामने मेरे!

जब दोस्तों की दोस्ती है सामने मेरे,
दुनिया में दुश्मनी की मिसालों को क्या करूँ|

राजेश रेड्डी

उठते सवालों को क्या करूँ!

मैं जानता हूँ सोचना अब एक जुर्म है,
लेकिन मैं दिल में उठते सवालों को क्या करूँ|

राजेश रेड्डी

मैं शिवालों को क्या करूँ!

दिल ही बहुत है मेरा इबादत के वास्ते,
मस्जिद को क्या करूँ मैं शिवालों को क्या करूँ|

राजेश रेड्डी

पाँवों के छालों को क्या करूँ!

चलना ही है मुझे मेरी मंज़िल है मीलों दूर,
मुश्किल ये है कि पाँवों के छालों को क्या करूँ|

राजेश रेड्डी