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काहे को दुनिया बनाई!

एक बार फिर से आज सामान्य जन के कवि, शैलेन्द्र जी की बात करते हैं और उनके ड्रीम प्रोजेक्ट, फिल्म- ‘तीसरी कसम’ का एक गीत शेयर करूंगा| शैलेन्द्र जी की इस नायाब फिल्म की खास बात यह है कि फणीश्वरनाथ रेणु जी की कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ पर ऐसी फिल्म बनाना एक बहुत बड़ा जोखिम था, जिसे शैलेन्द्र जी ने उठाया और सखा रआज कपूर जी ने , जो ड्रीम मर्चेन्ट थे, भव्य सेट्स पर बनने वाली फिल्मों के लिए जाने जाते थे, उन्होंने इस फिल्म के लिए एक सीधे-सादे देहाती की भूमिका निभाई, और यह भूमिका उन्होंने मांग कर ली, शैलेन्द्र किसी कम प्रसिद्ध कलाकार को यह भूमिका देना चाहते थे, जिसकी ग्लैमरस इमेज न हो, लेकिन मानना पड़ेगा कि रआज कपूर जी ने इस भूमिका के साथ पूरा न्याय किया|

फिल्म के बारे में बहुत सी बातें की जा सकती हैं, फिलहाल मैं जो गीत शेयर कर रहा हूँ, उसकी ही बात करूंगा और उसे शेयर करूंगा| शैलेन्द्र जी के लिखे इस गीत के लिए संगीत शंकर जयकिशन की सुरीली जोड़ी ने दिया है और इसे सीधे-साधे गाड़ीवान बने रआज कपूर पर फिल्माया गया है| गीत में शैलेन्द्र जी ने जैसे एक सरल और निष्कपट ग्रामीण के मन को जैसे खोलकर रख दिया है, किस तरह सरलता के साथ वह ईश्वर से संवाद और शिकायत करता है| बाकी तो गीत अपने आप बयान करता है| लीजिए प्रस्तुत है यह गीत-


दुनिया बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई
काहे को दुनिया बनायी
तूने काहे को दुनिया बनायी|

काहे बनाये तूने माटी के पुतले
धरती ये प्यारी प्यारी मुखड़े ये उजले
काहे बनाया तूने दुनिया का खेला
जिसमें लगाया जवानी का मेला
गुप-चुप तमाशा देखे वाह रे तेरी खुदाई|
काहे को दुनिया बनायी|



तू भी तो तड़पा होगा मन को बनाकर
तूफां ये प्यार का मन में छुपाकर
कोई छवि तो होगी आँखों में तेरी
आंसू भी छलके होंगे पलकों से तेरी
बोल क्या सूझी तुझको
काहे को प्रीत जगाई
काहे को दुनिया बनायी
तूने काहे को दुनिया बनायी|



प्रीत बनाके तूने जीना सिखाया
हँसना सिखाया, रोना सिखाया
जीवन के पथ पर मीत मिलाये
मीत मिला के तूने सपने जगाए
सपने जगा के तूने, काहे को दे दी जुदाई
काहे को दुनिया बनायी तूने
दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई
काहे को दुनिया बनाई|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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बदनाम न हो प्यार मेरा!

आज मैं एक बार फिर से हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी और लता जी का गाया एक युगल गीत शेयर कर रहा हूँ, 1953 में रिलीज़ हुई राज कपूर जी की फिल्म- ‘आह’ के लिए इस गीत को लिखा था हसरत जयपुरी जी ने और शंकर – जयकिशन की संगीतमय जोड़ी के संगीत निर्देशन में इसे मुकेश जी और लता मंगेशकर जी ने गाया है|

लीजिए आज प्रस्तुत है मुकेश जी और लता जी का यह बहुत प्यारा सा गीत –


आजा रे अब मेरा दिल पुकारा
रो-रो के ग़म भी हारा
बदनाम न हो प्यार मेरा|

मौत मेरी तरफ आने लगी
जान तेरी तरफ जाने लगी
बोल शाम-ए-जुदाई क्या करे
आस मिलने की तड़पाने लगी|

घबराए हाय रे दिल
सपनों में आ के कभी मिल|


अपने बीमार-ए-ग़म को देख ले
हो सके तो तू हम को देख ले
तूने देखा न होगा ये समां
कैसे जाता है दम वो देख ले|

आजा रे अब मेरा दिल पुकारा
रो-रो के ग़म भी हारा
बदनाम न हो प्यार मेरा|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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ना समझे वो अनाड़ी हैं!

कल राज कपूर जी की ‘आवारा’ फिल्म का एक गीत शेयर किया था, आज उनकी ही फिल्म ‘अनाड़ी’ का एक गीत याद आ रहा है|

कल के गाने में भी राजकपूर थे, उनकी नायिका तो होगी ही, लेकिन आज की फिल्म में नायिका नर्गिस जी नहीं ‘नूतन जी थीं, एक बात और है, इन दोनों गीतों में ही चांद भी है| और हाँ, आज के गीत में लता जी गाती हैं, नायक को ‘अनाड़ी’ बताती हैं, और नायक की तरफ से मुकेश जी बीच-बीच में सिर्फ इसकी हामी भर देते हैं|

राज कपूर जी की इस फिल्म का संगीत भी शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने दिया था और यह गीत भी शैलेन्द्र जी ने ही लिखा था|

लीजिए आज प्रस्तुत है फिल्म- ‘अनाड़ी’ का यह प्यारा सा गीत-


वो चांद खिला, वो तारे हँसे
ये रात अजब मतवाली है,
समझने वाले समझ गए हैं,
ना समझे, ना समझे वो अनाड़ी हैं|
वो चांद खिला–

चांदी सी चमकती राहें,
वो देखो झूम-झूम के बुलाएं|
किरणों ने पसारी बाँहें
कि अरमां, झूम-झूम लहराएं|
बजे दिल के तार, गाये ये बहार
उभरे है प्यार जीवन में|
वो चांद खिला–


किरणों ने चुनरिया तानी
बहारें किसपे हैं आज दीवानी,
चंदा की चाल मस्तानी
है पागल जिसपे रात की रानी|

तारों का जाल, ले ये दिल निकाल
पूछो न हाल मेरे दिल का|
वो चांद खिला–


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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हम हैं अनाड़ी!

आज 1959 में रिलीज हुई फिल्म -अनाड़ी, का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे शैलेन्द्र जी ने लिखा है और शंकर जयकिशन जी ने इसका संगीत दिया है| इस गीत के लिए गीत लेखन, संगीत और गायन तीनों श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ होने के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार प्रदान किए गए थे|

राजकपूर साहब पर फिल्माए गए इस गीत को गाया था मेरे प्रिय गायक – मुकेश जी ने|

कुछ बातों को हम आज के ज़माने में ज्यादा महत्व नहीं देते हैं, उनमें से एक है सादगी, ईमानदारी, सरलता| निदा फाज़ली साहब की एक पंक्ति मुझे बहुत अच्छी लगती है- ‘सोच-समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला‘|

खैर आज आप इस अमर गीत का आनंद लीजिए-

सब कुछ सीखा हमने, ना सीखी होशियारी
सच है दुनिया वालों, कि हम हैं अनाड़ी |

दुनिया ने कितना समझाया, कौन है अपना कौन पराया,
फिर भी दिल की चोट छुपाकर, हमने आपका दिल बहलाया|
खुद ही मर मिटाने की ये ज़िद है हमारी|

सच है दुनिया वालों, कि हम हैं अनाड़ी ||

दिल का चमन उजड़ते देखा, प्यार का रंग उतरते देखा,
हमने हर जीने वाले को, धन दौलत पर मरते देखा,
दिल पे मरने वाले, मरेंगे भिखारी|
सच है दुनिया वालों, कि हम हैं अनाड़ी ||


असली नकली चेहरे देखे, दिल पे सौ सौ पहरे देखे,
मेरे दुखते दिल से पूछो, क्या-क्या ख्वाब सुनहरे देखे,
टूटा जिस तारे पे, नजर थी हमारी|
सच है दुनिया वालों, कि हम हैं अनाड़ी ||

आज के लिए इतना ही|

नमस्कार|

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भाग न बाँचे कोय!

आज फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| आज का ये गीत, शैलेंद्र जी ने उनके द्वारा ही निर्मित फिल्म- ‘तीसरी कसम’ के लिए ही लिखा था और शंकर जयकिशन जी के संगीत निर्देशन में इसे मुकेश जी ने अपने लाजवाब अंदाज़ में गाया है|


इस फिल्म के बहाने मैं राजकपूर जी की टीम के बारे में भी कुछ बात करना चाहूँगा, जिसके शैलेंद्र जी, मुकेश जी और शंकर जयकिशन जी महत्वपूर्ण सदस्य रहे हैं| इनके अलावा हसरत जयपुरी जी, और संगीतकारों की कुछ अन्य टीम भी उनके साथ जुड़ी थीं|


आज मैं शैलेंद्र जी के बारे में ही कुछ कहना चाहूँगा, वे स्वभाव से ही सृजन धर्मी थे, उनको यह धुन सवार हुई कि वे फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ जी की अमर कृति ‘मारे गए गुलफाम’ पर एक फिल्म बनाएँगे| ऐसा नहीं है कि वे उनको इसमें शामिल जोखिम का अंदाज़ नहीं होगा और अंततः यह फिल्म तो उन्होंने बना ली, लेकिन जो सदमा उनको लगा वह उनके प्राण ही लेकर गया| ये अलग बात है कि इस फिल्म को राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त हुआ और उनकी मृत्यु के बाद इस फिल्म ने पर्याप्त कमाई भी की|


एक बात और, शैलेंद्र जी इस फिल्म में नायक की भूमिका किसी ऐसे कलाकार को देना चाहते थे, जो ‘हीरो’ के रूप में विख्यात न हो, क्योंकि एक सामान्य देहाती की भूमिका निभाने में उसकी हीरो वाली छवि बाधक हो सकती है| लेकिन उनके मित्र राज कपूर बोले कि ये भूमिका मैं ही निभाऊंगा और मानना पड़ेगा कि इस भूमिका के साथ राज कपूर जी ने पूरा न्याय किया|

लीजिए प्रस्तुत है फिल्म ‘तीसरी कसम’ का यह अमर गीत-

सजनवा बैरी हो गए हमार,
चिठिया हो तो हर कोई बाँचे
भाग न बाँचे कोय,
करमवा बैरी हो गये हमार|

जाय बसे परदेस बलमवा, सौतन के भरमाए
ना सन्देस, ना कोई खबरिया, रुत आए रुत जाए
ना कोई इस पार हमारा,
ना कोई उस पार
सजनवा बैरी हो गये हमार

सूनी सेज गोद मोरी सूनी, मरम ना जाने कोय,
छटपट तड़पे प्रीत बिचारी ममता आँसू रोए,
डूब गए हम बीच भँवर में
सरके सोलह पार,

करमवा बैरी हो गये हमार|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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मैं प्यार का परवाना!

आज एक बार फिर मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| मजे की बात ये है कि यह गीत भी 1968 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘दीवाना’ से ही है- यह गीत लिखा है हसरत जयपुरी जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया है- शंकर जयकिशन की संगीतमय जोड़ी ने|


इस एक ही फिल्म का यह पाँचवाँ गीत है, जो मैं शेयर कर रहा हूँ| असल में यह इस फिल्म का ‘थीम सांग’ है| ये एक तरह से सादगी का सेलीब्रेशन है| जैसे कहा जाए की हम सरल, सिंपल हैं और हमें इस पर गर्व है!

अब बिना और भूमिका बनाए, लीजिए प्रस्तुत है यह मधुर गीत-

दिवाना मुझको लोग कहें,
मैं समझूँ जग है दिवाना, ओ
मैं समझूँ जग है दिवाना,
दिवाना मुझको लोग कहें|

हँसता है कोई सूरत पे मेरी,
हँसता है कोई हालत पे मेरी,
छोटा ही सही, पर दिल है बड़ा,
मैं झूमता पैमाना|


मैं इंसां सीधा-साधा हूँ,
ईमान का मैं शहजादा हूँ,
है कौन बुरा मालिक जाने,
मैं प्यार का परवाना|

मैं यार की खातिर लुट जाऊँ,
और प्यार की खातिर मिट जाऊँ,
चलता ही रहूँ, हर मंज़िल तक,
अंजाम से बेगाना|


दीवाना मुझको लोग कहें,
मैं समझूँ जग है दीवाना, ओ
मैं समझूँ जग है दीवाना,
दिवाना मुझको लोग कहें|



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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आना ही होगा, तुझे आना हो होगा !

आज एक बार फिर मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| मजे की बात ये है कि यह गीत भी 1968 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘दीवाना’ से ही है- यह गीत लिखा है हसरत जयपुरी जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया है- शंकर जयकिशन की संगीतमय जोड़ी ने|


एक ही फिल्म का यह चौथा गीत है, जो मैं शेयर कर रहा हूँ| कैसा दिव्य समय था वह, बहुत सी फिल्मों के सभी गाने हिट होते थे, और यह फिल्म भी ऐसी ही थी और सभी गाने मुकेश जी के गाये हुए|


अब बिना और भूमिका बनाए, लीजिए प्रस्तुत है यह मधुर गीत-

तारों से प्यारे दिल के इशारे,
प्यासे है अरमां आ मेरे प्यारे,
आना ही होगा तुझे आना ही होगा आना ही होगा|

दिल तुझे याद करे और फ़रियाद करे,
पेड़ों की छाँव तले तेरा इंतज़ार करे,
साँझ-सकारे दिल ये पुकारे,
प्यासे है अरमां आ मेरे प्यारे|
आना ही होगा, तुझे आना हो होगा, आना ही होगा
|

हाल-ए-दिल जान ले तू, हमको पहचान ले तू,
हम कोई गैर नहीं बात ये मान ले तू,
बात ये मान ले तू|
हम हैं बेचारे, किस्मत के मारे,
प्यासे है अरमां आ मेरे प्यारे|

तारों से प्यारे दिल के इशारे|
प्यासे हैं अरमां आ मेरे प्यारे,
आना ही होगा तुझे आना हो होगा आना ही होगा|



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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न तुम हारे, न हम हारे!

लीजिए आज एक बार फिर मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और अमर गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत भी 1968 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘दीवाना’ से ही है- यह गीत लिखा है शैलेंद्र जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया है- शंकर जयकिशन की संगीतमय जोड़ी ने|


पिछले गीत की तरह इस गीत में भी, सीधे-सादे सरल हृदय लेकिन प्रेम से भरपूर देहाती व्यक्ति के मनोभावों को बहुत खूबसूरती से अभिव्यक्त किया गया है|


एक बात और, आजकल मैनेजमेंट गुरू लोगों को ‘विन-विन’ का पाठ बड़े ग्राफिक्स के साथ और लंबी-चौड़ी व्याख्या करते हुए समझाते हैं, इस गीत में इस सिद्धान्त को बड़ी सरल भाषा में व्यक्त कर दिया गया है|


लीजिए प्रस्तुत है यह मधुर गीत-

तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय
न तुम हारे, न हम हारे|
सफ़र साथ जितना था, हो ही गया तय
न तुम हारे, न हम हारे|

तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय|


याद के फूल को हम तो अपने, दिल से रहेंगे लगाए,
और तुम भी हँस लेना जब ये, दीवाना याद आए,
मिलेंगे जो फिर से मिला दें सितारे|
न तुम हारे, न हम हारे|
तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय|


वक़्त कहाँ रुकता है तो फिर, तुम कैसे रुक जाते
चाँद छुआ है आख़िर किसने, हम ही क्यूँ हाथ बढ़ाते
जो उस पार हो तुम, तो हम इस किनारे,
न तुम हारे, न हम हारे|
तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय|

था तो बहुत कहने को लेकिन, अब तो चुप बेहतर है,
ये दुनिया है एक सराय, जीवन एक सफ़र है,
रुका भी है कोई किसीके पुकारे|
न तुम हारे, न हम हारे|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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मुझे भी तो मोहब्बत दी है!

लीजिए एक बार फिर मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और अमर गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत है 1968 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘दीवाना’ से, गीत को लिखा है- हसरत जयपुरी जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया है- शंकर जयकिशन की संगीतमय जोड़ी ने|

सीधे-सादे, सरल हृदय लेकिन प्रेम से भरपूर देहाती व्यक्ति के मनोभावों को इस गीत में बहुत खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है|

लीजिए प्रस्तुत है यह मधुर गीत-

ऐ सनम जिसने तुझे चाँद सी सूरत दी है;
उसी मालिक ने मुझे भी तो मोहब्बत दी है|


फूल उठा ले तो कलाई में लचक आ जाए,
तुझ हसीना को खुदा ने वो नज़ाकत दी है|
मैं जिसे प्यार से छू लूं वही हो जाए मेरा,
उसी मालिक ने मुझे भी तो मोहब्बत दी है|


मैं गुज़रता ही गया तेरी हसीं राहों से
एक तेरे नाम ने क्या क्या
मुझे हिम्मत दी है|
मेरे दिल को भी ज़रा देख कहाँ तक हूँ मैं
उसी मालिक ने मुझे भी तो मोहब्बत दी है|


तू अगर चाहे तो दुनिया को नचा दे ज़ालिम
चाल दी है तुझे मालिक ने क़यामत दी है|
मैं अगर चाहूं तो पत्थर को बना दूं पानी,
उसी मालिक ने मुझे भी तो मोहब्बत दी है|

ऐ सनम जिसने तुझे चाँद सी सूरत दी है,
उसी मालिक ने मुझे भी तो मोहब्बत दी है|


आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|

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उन्हें घर मुबारक हमें अपनी आहें!

काफी दिन से मैंने अपने प्रिय गायक मुकेश जी का कोई गीत शेयर नहीं किया था, आज कर लेता हूँ| जी हाँ ये गीत है 1958 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘परवरिश’ का, गीत लिखा है- हसरत जयपुरी जी ने और इसका संगीत दिया है- दत्ताराम जी ने| इस फिल्म के नायक थे मेरे प्रिय अभिनेता और महान शोमैन- राज कपूर जी|


जैसा मैंने कल भी लिखा था गीत-कविता आदि में, छोटे से कलेवर में बहुत बड़ी बात कह दी जाती है| यह लेखक की कलाकारी है, लेकिन जब इसमें अच्छा संगीत जुड़ता है और मुकेश जी जैसे महान गायक की आवाज़ जुड़ जाती है, तब छोते से, मात्र दो अंतरों के इस गीत का फैलाव, इसका आयाम कितना बड़ा हो जाता है, यह सिर्फ अनुभव से ही जाना जा सकता है|


लीजिए प्रस्तुत है यह अमर गीत-

आँसू भरी हैं ये जीवन की राहें,
कोई उनसे कह दे हमें भूल जाएं|

वादे भुला दें क़सम तोड़ दें वो,
हालत पे अपनी हमें छोड़ दें वो|
ऐसे जहाँ से क्यूँ हम दिल लगाएं,
कोई उनसे कह दे हमें भूल जाएं|


बरबादियों की अजब दास्तां हूं,
शबनम भी रोये मैं वह आस्माँ हूं|
उन्हें घर मुबारक हमें अपनी आहें|

कोई उनसे कह दे हमें भूल जाएं|



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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