अगर रिश्ते नहीं ढोते !

आज एक बार फिर मैं अपने अत्यंत प्रिय कवि स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इस गीत में रंजक जी ने इस स्थिति पर प्रहार किया है कि लोग ज़िंदगी भर औपचारिकताओं को ढोते हैं| क्या ही अच्छा हो कि हम प्रेम के संबंध जिए और मात्र औपचारिकता वाले रिश्तों … Read more

जाने क्या हो गया सवेरों को!

आज फिर से मैं अपने एक अत्यंत प्रिय कवि स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| जीवन में बहुत तरह की परिस्थितियों, बहुत सी परीक्षाओं से गुज़रना पड़ता है, आज तो पूरी मानव-जाति को कोरोना की परीक्षा देनी पड़ी है और हमारे देश पर यह संकट इस समय कुछ अधिक ही … Read more

मेरा बदन हो गया पत्थर का!

स्वर्गीय रमेश रंजक जी मेरे प्रिय कवि रहे हैं, उनका स्नेह भी मिला मुझे और एक विशेषता थी उनमें कि यदि अच्छी रचना उनके शत्रु की भी हो तो उसकी तारीफ़ अवश्य करते थे| कम शब्दों में कैसे बड़ी बात कही जाए, यह उनकी रचनाओं में देखा जा सकता है| आज मैं रंजक जी का … Read more

चाय-सी ठंडी हँसी, आँखें तराजू!

एक बार फिर से मैं अपने एक प्रिय कवि और नवगीत विधा के प्रमुख हस्ताक्षर स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| रंजक जी ने हर प्रकार के गीत लिखे हैं और वे जुझारूपन और बेबाकी के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं| लीजिए प्रस्तुत है रंजक जी का यह … Read more

ख़ून गिरा पी गई कचहरी!

आज एक श्रेष्ठ गीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| दिल्ली में रहते हुए उनसे मिलने के, उनका ओजस्वी काव्य-पाठ सुनने और उनके समक्ष अपनी कुछ रचनाएँ प्रस्तुत करने के भी अवसर प्राप्त हुए थे|जैसे कोई योद्धा युद्ध में वीर-गति को प्राप्त होता है, रंजक जी के साथ ऐसा … Read more

ये मुझसे तगड़े हैं- रमेश रंजक

हिन्दी के चर्चित नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ, इस गीत में रंजक जी ने कितनी खूबसूरती से यह अभिव्यक्त किया है कि दुख घर से जाने का नाम ही नहीं ले रहे हैं| लीजिए प्रस्तुत है यह गीत- जिस दिन से आए उस दिन से घर में … Read more

पेट की पगडंडियों के जाल से आगे!

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ-     आज क़तील शिफाई जी की एक गज़ल याद आ रही है, क्या निराला अंदाज़ है बात कहने का! शायर महोदय, जिनकी नींद उड़ गई है परेशानियों के कारण, वो रात भर जागते हैं, आसमान की तरफ देखते रहते हैं और उनको लगता … Read more

केवल कीं नंगी अठखेलियाँ हवा ने!

एक बार फिर से मैं अपने एक प्रिय कवि-नवगीतकार रहे स्व. रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ।हूँ। यह गीत रंजक जी के 1969 में प्रकाशित हुए नवगीत संकलन ‘हरापन नहीं टूटेगा’ से लिया गया है। आजकल दुनिया में जो कोरोना की महामारी फैली है, हजारों लोग इस भयावह रोग की भेंट … Read more

अपनी भाषा की रोशनी में चलता रहूँ – रमेश रंजक

आज मैं अपने प्रिय कवियों में से एक रहे स्व. रमेश रंजक जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। यह जानकर अच्छा लगता है कि रमेश रन्जक जी से कुछ बार बात करने का, उनके नवगीत सुनने का अवसर मिला और एक बार उन्होंने मेरा गीत सुनकर उसे नवगीत संकलन अंतराल-4 में प्रकाशित करने … Read more

अपनी छोटी-सी ज़मीन पर , अपनी उगा फसल!

आज स्व. रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। इस गीत में रंजक जी ने नए कवियों को संबोधित करते हुए यह संदेश दिया है कि वे मौलिकता पर पूरा ध्यान दें। अक्सर यह होता है कि लोग तेजी से आगे बढ़ने के लिए दूसरों की नकल करने लगते हैं, बहुत से … Read more

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