तअ’ल्लुक़ मर नहीं जाता!

वो मेरे घर नहीं आता मैं उसके घर नहीं जाता,
मगर इन एहतियातों से तअ’ल्लुक़ मर नहीं जाता|

वसीम बरेलवी

गिला न करेंगे किसी से हम!

लो आज हमने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उमीद,
लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम|

साहिर लुधियानवी

कुछ दिन ही अच्छा लगता है!

तुम क्या बिछड़े भूल गये रिश्तों की शराफ़त हम,
जो भी मिलता है कुछ दिन ही अच्छा लगता है|

निदा फ़ाज़ली

नाम सुनता हैं तुम्हारा तो—

ना त-आरूफ़ ना त-अल्लुक हैं मगर दिल अक्सर,
नाम सुनता हैं तुम्हारा तो उछल पड़ता है|

राहत इन्दौरी