मुझे तूने मुसीबत से निकाला!

ऐ मौत मुझे तूने मुसीबत से निकाला,
सय्याद समझता था रिहा हो नहीं सकता|

मुनव्वर राना

कोई सूरत नहीं रिहाई की!

मैं ही मुल्ज़िम हूँ मैं ही मुंसिफ़ हूँ,
कोई सूरत नहीं रिहाई की|

बशीर बद्र