जिन्हें नाम भी अपना नहीं आता!

भूले थे उन्हीं के लिए दुनिया को कभी हम,
अब याद जिन्हें नाम भी अपना नहीं आता|

आनंद नारायण मुल्ला

नाम तुम्हारा मुझे जपना नहीं आता!

ये अश्क-ए-मुसलसल हैं महज़ अश्क-ए-मुसलसल,
हाँ नाम तुम्हारा मुझे जपना नहीं आता|

आनंद नारायण मुल्ला

आज ये किस बात पे रोना आया!

हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको,
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया|

साहिर लुधियानवी

फूल चट्टान पर खिला देखा!

संगदिल को हमारी याद आई,
फूल चट्टान पर खिला देखा।

नक़्श लायलपुरी

रुख़सत का समां याद रहेगा!

उस शाम वो रुख़सत का समां याद रहेगा,
वो शहर, वो कूचा, वो मकाँ याद रहेगा|

इब्ने इंशा

जो बिसाते-जाँ ही उलट गया!

जो बिसाते-जाँ ही उलट गया, वो जो रास्ते से पलट गया,
उसे रोकने से हुसूल क्या? उसे भूल जा…उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

मेरे साथ आ उसे भूल जा!

मैं तो गुम था तेरे ही ध्यान में, तेरी आस तेरे गुमान में,
सबा कह गयी मेरे कान में, मेरे साथ आ उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

आँख से बरसात नहीं होती है!

छुप के रोता हूँ तेरी याद में दुनिया भर से,
कब मेरी आँख से बरसात नहीं होती है|

शकील बदायूँनी

जिनसे हमें उल्फत भी थी!

क्या क़यामत है ‘मुनीर’ अब याद भी आते नहीं,
वो पुराने आशना जिनसे हमें उल्फत भी थी|

मुनीर नियाज़ी