प्यार की बोली बोले कौन!

लोग अपनों के खूँ में नहाकर, गीता और कुरान पढ़ें,
प्यार की बोली याद है किसको, प्यार की बोली बोले कौन।

राही मासूम रज़ा

तुम तरस नहीं खाते–

लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते, बस्तियाँ जलाने में|

बशीर बद्र

हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ है!

आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूँ है,
ज़ख़्म हर सर पे, हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ है|

सुदर्शन फाक़िर

न कहीं ख़ून-ख़राबा होगा!

इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।
है यक़ीं अब न कोई शोर-शराबा होगा
ज़ुल्म होगा न कहीं ख़ून-ख़राबा होगा|

साबिर दत्त