लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में!

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में|

बशीर बद्र

सियासत से तबाही का!

बड़ा गहरा तअल्लुक़ है सियासत से तबाही का,
कोई भी शहर जलता है तो दिल्ली मुस्कुराती है|

मुनव्वर राना

कोई अता-पता ही नहीं!

जिसके कारण फ़साद होते हैं
उसका कोई अता-पता ही नहीं।

कृष्ण बिहारी ‘नूर’