लो चांद निकल आया!

आज एक गीत फिल्म ‘एक बार मुस्कुरा दो’ से, हमारे प्रिय गायक मुकेश जी और आशा भौंसले जी के मधुर युगल स्वरों में, इसका संगीत तैयार किया है ओ. पी.नैयर जी ने और गीत लिखा था एस एच बिहारी जी ने| आशा जी और मुकेश जी का यह रोमांटिक युगल गीत आज भी हमारे मन में गूंजता रहता है|

लीजिए प्रस्तुत हैं फिल्म- ‘एक बार मुस्कुरा दो’ के लिए आशा जी और मुकेश जी द्वारा गाये गए इस मधुर गीत के बोल :


चेहरे से ज़रा आंचल
जब आपने सरकाया,
दुनिया ये पुकार उठी,
लो चांद निकल आया|

माना के वो हीरा हो,
मुश्किल से जो हाथ आये,
इतना भी ना तड़पाओ,
के जान निकल जाये|

छोड़ो जी ना ये झगड़े,
एक बार मुस्कुरा दो,
तकदीर है क्या अपनी,
मैंने जो तुम्हें पाया|


वैसे तो मुझे तुम पर
पूरा ही भरोसा है,
कैसे वो भुला दूं मैं
जो आँखों ने देखा है|

छेड़ोगे, दिल तोड़ोगे,
एक बार मुस्कुरा दो
इतनी सी शिकायत पर,
कितना मुझे तड़पाया|

दुनिया ये पुकार उठी,
लो चांद निकल आया|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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सुहानी चांदनी रातें|

आज एक गीत फिल्म ‘मुक्ति’ से, हमारे प्रिय गायक मुकेश जी के मधुर स्वर में, इसका संगीत तैयार किया है राहुल देव बर्मन जी ने और गीत लिखा था आनंद बख्शी जी ने| मुकेश जी का यह रोमांटिक गीत आज भी हमारे मन में गूंजता रहता है|

लीजिए प्रस्तुत हैं फिल्म- ‘मुक्ति’ के लिए मुकेश जी द्वारा गाये गए इस मधुर गीत के बोल :

सुहानी चांदनी रातें, हमें सोने नहीं देतीं
तुम्हारे प्यार की बातें, हमें सोने नहीं देतीं
सुहानी चांदनी रातें, हमें सोने नहीं देतीं|

तुम्हारी रेशमी जुल्फ़ों में दिल के फूल खिलते थे
इन्हीं फूलों के मौसम में, कभी हम तुम भी मिलते थे,
पुरानी वो मुलाकातें, हमें सोने नही देतीं
तुम्हारे प्यार की बातें, हमें सोने नहीं देतीं|
सुहानी चांदनी रातें …

कहीं ऐसा न हो लग जाये दिल में आग पानी से
बदल ले रास्ता अपना घटाएं मेहरबानी से,
कि यादों की ये बरसातें, हमें सोने नहीं देतीं
तुम्हारे प्यार की बातें, हमें सोने नहीं देतीं|
सुहानी चांदनी रातें …

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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प्यासी है ज़िंदगी और मुझे प्यार दो!

आज फिर से मैं, मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत फिल्म ‘फिल्म-होली आई रे’ के लिए लिखा था क़मर जलालाबादी साहब ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था कल्याणजी-आनंदजी की प्रसिद्ध जोड़ी ने|

लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी और लता जी के स्वर में, हमारी स्मृतियों में बसा यह मधुर गीत:

मुकेश- मेरी तमन्नाओं की तक़दीर तुम सँवार दो
प्यासी है ज़िंदगी और मुझे प्यार दो|

नील गगन मण्डप है सारा जग बराती
मन के फेरे सच्चे, सच्चे हैं हम साथी
लाज का ये घूँघट पट आज तो उतार दो
प्यासी है ज़िंदगी …

धरती करवट बदले, बदले हर मौसम
प्रीत के पुजारी हैं बदलेंगे नहीं हम
पतझड़ सा जीवन है, प्यार की बहार दो
प्यासी है ज़िंदगी …


लता- मेरी तमन्नाओं की तकदीर तुम सँवार दो
प्यासी है ज़िन्दगी तुम मुझे प्यार दो|

प्यार का अकाल पड़ा सारे ही जग में
धोखे हुए हर दिल में, नफ़रत है रग-रग में
सबने डुबोया है मुझे, पार तुम उतार दो|

खुशी यहाँ थोड़ी सी और बहुत ग़म हैं
जितना भी प्यार मिले, उतना ही कम है
ग़म से भरे जीवन को प्यार से निखार दो|
प्यासी है ज़िन्दगी तुम मुझे प्यार दो|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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मेरे हमसफ़र

आज फिर से मैं मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, जो कि आनंद बख्शी जी ने लिखे थे| फिल्म ‘मेरे हमसफ़र’ के लिए इसका संगीत तैयार किया था कल्याणजी आनंदजी की संगीतमय जोड़ी ने|

लीजिए प्रस्तुत है लता मंगेशकर जी और मुकेश जी के युगल स्वरों में यह मधुर गीत:


किसी राह में, किसी मोड़ पर
कहीं चल ना देना तू छोड़कर,
मेरे हमसफ़र, मेरे हमसफ़र|

किसी हाल में, किसी बात पर
कहीं चल ना देना तू छोड़कर,
मेरे हमसफ़र, मेरे हमसफ़र

मेरा दिल कहे कहीं ये ना हो,
नहीं ये ना हो, नहीं ये ना हो
किसी रोज तुझ से बिछड़ के मैं,
तुझे ढूँढती फिरू दरबदर|

तेरा रंग साया बहार का,
तेरा रूप आईना प्यार का
तुझे आ नज़र में छुपा लूँ मैं,
तुझे लग ना जाये कहीं नज़र

तेरा साथ है तो है ज़िन्दगी,
तेरा प्यार है तो है रोशनी
कहाँ दिन ये ढल जाये क्या पता,
कहाँ रात हो जाये क्या खबर|

मेरे हमसफ़र, मेरे हमसफ़र|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिए !

आज फिर से   मैं  हम सबके प्यारे मुकेश जी का गाया एक और बहुत प्यारा और लोकप्रिय  गीत  शेयर कर रहा हूँ|  

कभी कभी खयाल आता है कि जो गीत हम अक्सर गुनगुनाते रहते हैं, शेयर करने के लिए उसका खयाल क्यों नहीं आता|

आज मैं अमिताभ बच्चन जी, राखी जी और शशि कपूर जी की भूमिकाओं से युक्त यह गीत शेयर कर रहा हूँ, संदर्भ तो अधिकांश लोगों को याद ही होगा| फिल्म 'कभी कभी' के लिए साहिर लुधियानवी जी के लिखे इस गीत को खय्याम जी के संगीत निर्देशन में लता जी और मुकेश जी ने  गाया है| लीजिए प्रस्तुत है लता जी और मुकेश जी का यह सदाबहार युगल   गीत:





 

कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
के जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिये 
तू अबसे पहले सितारों में बस रही थी कहीं 
तुझे ज़मीं पे बुलाया गया है मेरे लिये 
कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है|

कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
के ये बदन ये निगाहें मेरी अमानत हैं
ये गेसुओं की घनी छाँव हैं मेरी ख़ातिर
ये होंठ और ये बाहें मेरी अमानत हैं
कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है|

कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
के जैसे तू मुझे चाहेगी उम्र भर यूँही
उठेगी मेरी तरफ़ प्यार की नज़र यूँही
मैं जानता हूँ के तू ग़ैर है मगर यूँही
कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है

कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
के जैसे बजती हैं शहनाइयां सी राहों में
सुहाग रात है घूँघट उठा रहा हूँ मैं ,
सिमट रही है तू शरमा के मेरी बाहों में
कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार 
                                                                   ******

बहारो थाम लो अब दिल!

आज फिर से एक बार मैं एक युगल गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे लता मंगेशकर जी और मुकेश जी ने गाया है| फिल्म – ‘नमस्ते जी’ के लिए यह गीत लिखा था अंजान साहब ने और इसका संगीत दिया था जी एस. कोहली जी ने| मुकेश जी और लता जी के बहुत से रोमांटिक गीतों में यह गीत भी शामिल है|

लीजिए आज प्रस्तुत है यह मधुर गीत-


बहारो थाम लो अब दिल,
मेरा महबूब आता है,
शरारत कर न नाजुक दिल
शरम से डूब जाता है|

कहर अंदाज़ हैं तेरे,
क़यामत हैं तेरी बातें|
मेरी तो जान लेंगे
ये बातें ये मुलाकातें|
सनम शरमाए जब ऐसे,
मज़ा कुछ और आता है|


शरारत कर न नाजुक दिल
शरम से डूब जाता है|

लबों पर ये हँसी कातिल,
गज़ब जादू निगाहों में,
कसम तुझको मुहब्बत की
मचल ऐसे न राहों में|
मचल जाता है दिल जब
रू-ब-रू दिलदार आता है|

बहारो थाम लो अब दिल,
मेरा महबूब आता है,
शरारत कर न नाजुक दिल
शरम से डूब जाता है|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
* *****

दम भर जो उधर मुँह फेरे!

आज मुकेश जी और लता जी का एक रोमांटिक युगल गीत याद आ रहा है| गीतकार शैलेन्द्र जी का लिखा यह गीत, 1951 में रिलीज़ हुई फिल्म-‘आवारा’ में राज कपूर और नर्गिस की सदाबहार जोड़ी पर फिल्माया गया था और इसका मधुर संगीत शंकर-जयकिशन की संगीतमय जोड़ी ने तैयार किया था|

हमारे कवि-रचनाकार चांद से भी क्या-क्या काम करवाते हैं| इस गीत में शर्मीली नायिका तो चांद से अनुरोध करती है कि वह छिप जाए, जिससे वह नायक से कुछ प्यार कर सके| लेकिन नायक जो अपने आप को खुले-आम चोर घोषित करता है, वो चांद से कहता है कि वह देखे और इसकी गवाही भी दे कि वह किस तरह दिल चुराता है|

लीजिए प्रस्तुत है फिल्म- ‘आवारा’ का यह चुलबुला गीत-


दम भर जो उधर मुँह फेरे, ओ चंदा,
मैं उनसे प्यार कर लूँगी, बातें हज़ार कर लूँगी|

दिल करता है प्यार के सजदे, और मैं भी उनके साथ
चांद को चंदा रोज ही देखे, मेरी पहली रात,
बादल में अब छुप जा रे, ओ चंदा
मैं उनसे प्यार कर लूँगी, बातें हज़ार कर लूँगी|


दमभर जो इधर मुँह फेरे, ओ चंदा
मैं उन से प्यार कर लूँगा, नज़रें तो चार कर लूँगा

मैं चोर हूँ काम है चोरी, दुनिया में हूँ बदनाम
दिल को चुराता आया हूँ, ये ही है मेरा काम
आना तू गवाही देने, ओ चंदा
मैं उनसे प्यार कर लूँगा, नज़रें तो चार कर लूँगा|


दिल को चुरा के खो मत जाना, राह न जाना भूल
इन कदमों से कुचल न देना मेरे दिल का फूल
ये बात उन्हे समझा दे, ओ चंदा
मैं उन से प्यार कर लूँगी, बातें हज़ार कर लूँगी|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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