बहार पे इल्ज़ाम धर के देखते हैं!

सुना है उसके लबों से गुलाब जलते हैं,
सो हम बहार पे इल्ज़ाम धर के देखते हैं|

अहमद फ़राज़

होठों पे खिलते गुलाब रखते हैं!

वो पास बैठें तो आती है दिलरुबा ख़ुश्बू,
वो अपने होठों पे खिलते गुलाब रखते हैं|

हसरत जयपुरी