हमीं ने शाम चुनी है!

सहर भी, रात भी, दोपहर भी मिली लेकिन,
हमीं ने शाम चुनी है, नहीं उदास नहीं|

गुलज़ार

तोहमत मेरे नाम तक न पहुँचे!

ग़मे-आशिक़ी से कह दो रहे–आम तक न पहुँचे,
मुझे ख़ौफ़ है ये तोहमत मेरे नाम तक न पहुँचे।

शकील बदायूँनी

रोता हुआ सा कुछ!

फ़ुर्सत ने आज घर को सजाया कुछ इस तरह,
हर शय से मुस्कुराता है रोता हुआ सा कुछ|

निदा फ़ाज़ली

बेकार हमें ग़म होता है!

सच ये है बेकार हमें ग़म होता है,
जो चाहा था दुनिया में कम होता है|

जावेद अख़्तर

दिया जलाये जो दर पर!

ये मेरे घर की उदासी है और कुछ भी नहीं,
दिया जलाये जो दर पर मेरी तलाश में है|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

आज ज़िक्र-ए-यार चले!

क़फ़स उदास है यारो सबा से कुछ तो कहो,
कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़