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मोहब्बत रास्ता ही रास्ता है!

आज मैं प्रसिद्ध उर्दू शायर जनाब असद भोपाली जी की एक खूबसूरत सी ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| इस छोटी सी ग़ज़ल में कुछ असरदार शेरों के माध्यम से शायर ने मुहब्बत के जज़्बे और हौसले को अभिव्यक्त किया है|

लीजिए प्रस्तुत है ये खूबसूरत ग़ज़ल-

न साथी है न मंज़िल का पता है,
मोहब्बत रास्ता ही रास्ता है|

वफ़ा के नाम पर बर्बाद होकर,
वफ़ा के नाम से दिल काँपता है|

मैं अब तेरे सिवा किसको पुकारूँ,
मुक़द्दर सो गया ग़म जागता है|

वो सब कुछ जानकर अनजान क्यूँ हैं,
सुना है दिल को दिल पहचानता है|


ये आँसू ढूँढता है तेरा दामन,
मुसाफ़िर अपनी मंज़िल जानता है|


आज के लिए इतना ही
नमस्कार|
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क्या दीप जलाएं हम, तक़दीर ही काली है!

दीपावली के अवसर पर, एक बार फिर से मुझे अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत याद आ रहा है।

दीपावली भी हमारी खुशियों को जाहिर करने का एक अवसर है, हम जितने अधिक खुश होंगे, उतने ही अधिक उत्साह के साथ हम इन त्यौहारों के अवसर पर उल्लास के साथ भाग लेंगे।

यह गीत फिल्म नज़राना में दो बार आया है, एक बार खुशी के मूड में और एक बार उदासी के मूड में, राजिंदर कृष्ण जी ने गीत को लिखा है और संगीत दिया है- रवि जी ने।

खुशी के मूड वाला गीत, जिसे लता जी ने गाया है उसका मुखड़ा इस प्रकार है-

 

मेले हैं चरागों के, रंगीन दिवाली है,
खिलता हुआ गुलशन है, हंसता हुआ माली है।

 

और इसके बाद मैं उदासी के महौल में मुकेश जी द्वारा गाये गए इस गीत को यहाँ शेयर कर रहा हूँ-

 

एक वो भी दिवाली थी, एक ये भी दिवाली है
उजड़ा हुआ गुलशन है, रोता हुआ माली है|

 

बाहर तो उजाला है मगर दिल में अँधेरा,
समझो ना इसे रात, ये है ग़म का सवेरा|
क्या दीप जलायें हम, तक़दीर ही काली है,
उजड़ा हुआ गुलशन है, रोता हुआ माली है।

 

ऐसे न कभी दीप किसी दिल का बुझा हो,
मैं तो वो मुसाफ़िर हूँ जो रस्ते में लुटा हो।
ऐ मौत तू ही आ जा, दिल तेरा सवाली है
उजड़ा हुआ गुलशन है, रोता हुआ माली है।

 

एक वो भी दिवाली थी, एक ये भी दिवाली है,
उजड़ा हुआ गुलशन है, रोता हुआ माली है।

 

यह तो गीत की बात थी, जीवन में दुख-सुख तो लगे ही रहते हैं।

आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

नमस्कार।

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