ज़हर नहीं हैं कि मैं खा भी न सकूँ!

इक न इक रोज़ कहीं ढूँढ ही लूँगा तुझको,
ठोकरें ज़हर नहीं हैं कि मैं खा भी न सकूँ|

राहत इन्दौरी

शहर की गलियों में कहीं रहता है!

मिल ही जाएगा कभी दिल को यक़ीं रहता है,
वो इसी शहर की गलियों में कहीं रहता है|

अहमद मुश्ताक़

नया आसमाँ नहीं मिलता!

मैं ढूँढता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलता,
नई ज़मीन नया आसमाँ नहीं मिलता|

कैफ़ी आज़मी

महफ़िलों में तुझे ढूँढता हूँ मैं!

बिखरा पड़ा है तेरे ही घर में तेरा वजूद,
बेकार महफ़िलों में तुझे ढूँढता हूँ मैं|

क़तील शिफ़ाई

मंज़िल थे बजाए ख़ुद भी!

यूँ तुझे ढूँढ़ने निकले के न आए ख़ुद भी,
वो मुसाफ़िर कि जो मंज़िल थे बजाए ख़ुद भी|

अहमद फ़राज़

ये एक जुगनू ने समझा दिया!

हमें खुद अपने सितारे तलाशने होंगे,
ये एक जुगनू ने समझा दिया चमक के मुझे|

राहत इन्दौरी

वो ढूँढ रहा है मुझमें!

मेरे चहरे पे मुसलसल हैं निगाहें उसकी,
जाने किस शख़्स को वो ढूँढ रहा है मुझमें|

राजेश रेड्डी