रुख़सत का समां याद रहेगा!

उस शाम वो रुख़सत का समां याद रहेगा,
वो शहर, वो कूचा, वो मकाँ याद रहेगा|

इब्ने इंशा

हाथ हिलाए भी, घबराये भी!

आने वाली रुत का कितना खौफ है उसकी आंखों में,
जाने वाला दूर से हाथ हिलाए भी, घबराये भी|

मोहसिन नक़वी

घर छोड़ के जाने वाला!

उसको रुखसत तो किया था मुझे मालूम न था,
सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला|

निदा फ़ाज़ली

हाथ के रूमाल सा, हिलता रहा मन!

तुम गए क्या जग हुआ अंधा कुआं
रेल छूटी रह गया केवल धुआं,
हम भटकते ही फिरे बेहाल,
हाथ के रूमाल सा, हिलता रहा मन।

किशन सरोज