कि संग तुझपे गिरे और ज़ख़्म आये मुझे!

ये मोजज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाये मुझे
कि संग तुझपे गिरे और ज़ख़्म आये मुझे।

क़तील शिफाई

आईने से घबराओगे!

तनहाई के झूले झूलोगे, हर बात पुरानी भूलोगे
आईने से घबराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जायेगा

सईद राही

सीढ़ी फिसल न जाए कहीं!

कभी मचान पे चढ़ने की आरज़ू उभरी
कभी ये डर कि ये सीढ़ी फिसल न जाए कहीं|

दुष्यंत कुमार