प्यार कहाँ समझाने दे!

फ़स्लें पक जाएँ तो खेत से बिछ्ड़ेंगी,
रोती आँख को प्यार कहाँ समझाने दे|

वसीम बरेलवी

हाथों में चाँद आ जाने दे!

फिर तो ये ऊँचा ही होता जाएगा,
बचपन के हाथों में चाँद आ जाने दे|

वसीम बरेलवी

इस बाग़ का एक परिंदा हूँ!

मैं भी तो इस बाग़ का एक परिंदा हूँ,
मेरी ही आवाज़ में मुझको गाने दे|

वसीम बरेलवी

दूर तो मुझ को जाने दे!

बाबा दुनिया जीत के मैं दिखला दूँगा,
अपनी नज़र से दूर तो मुझ को जाने दे|

वसीम बरेलवी

मेरे हिस्से की धूप आने दे!

अपने साए को इतना समझाने दे,
मुझ तक मेरे हिस्से की धूप आने दे|

वसीम बरेलवी

रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा!

मुझको चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़र,
रास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा|

वसीम बरेलवी

मसअला बन कर खड़ा हो जाऊँगा!

तुम गिराने में लगे थे तुमने सोचा ही नहीं,
मैं गिरा तो मसअला बन कर खड़ा हो जाऊँगा|

वसीम बरेलवी

मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा!

अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आइना हो जाऊँगा,
उसको छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा|

वसीम बरेलवी

अपनी कहो अब तुम कैसे हो!

हमसे न पूछो हिज्र के क़िस्से,
अपनी कहो अब तुम कैसे हो|

मोहसिन नक़वी