कभी मुझसे वो मिला भी है!

ज़रूर वो मेरे बारे में राय दे लेकिन,
ये पूछ लेना कभी मुझसे वो मिला भी है|

राहत इन्दौरी

घर में आईना भी है?

जवाब दे ना सका, और बन गया दुश्मन,
सवाल था, के तेरे घर में आईना भी है?

राहत इन्दौरी

ख्वाबों का मसअला भी है!

सवाल नींद का होता तो कोई बात ना थी,
हमारे सामने ख्वाबों का मसअला भी है|

राहत इन्दौरी

पत्थर भी है खुदा भी है!

मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ,
मेरी नज़र में वो पत्थर भी है खुदा भी है|

राहत इन्दौरी

भला ही नहीं, बुरा भी है!

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है,
वो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है|

राहत इन्दौरी

लेना है उसका नाम, चलो मयकदे चलें!

ऐसी फ़ज़ा में लुत्फ़े-इबादत न आएगा,
लेना है उसका नाम, चलो मयकदे चलें|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

साक़ी भी है, शराब भी, आज़ादियाँ भी हैं!

साक़ी भी है, शराब भी, आज़ादियाँ भी हैं,
सब कुछ है इंतज़ाम, चलो मयकदे चलें|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

-लेकर ख़ुदा का नाम, चलो–

यारो जो होगा देखेंगे, ग़म से तो हो निजात,
लेकर ख़ुदा का नाम, चलो मयकदे चलें|

कृष्ण बिहारी ‘नूर

जीना न हो हराम!

अच्छा, नहीं पियेंगे जो पीना हराम है,
जीना न हो हराम, चलो मयकदे चलें|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

खुल के जहाँ बात हो सके!

दैरो-हरम पे खुल के जहाँ बात हो सके,
है एक ही मुक़ाम, चलो मयकदे चलें|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’