पत्थर भी है खुदा भी है!

मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ,
मेरी नज़र में वो पत्थर भी है खुदा भी है|

राहत इन्दौरी

भला ही नहीं, बुरा भी है!

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है,
वो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है|

राहत इन्दौरी

लेना है उसका नाम, चलो मयकदे चलें!

ऐसी फ़ज़ा में लुत्फ़े-इबादत न आएगा,
लेना है उसका नाम, चलो मयकदे चलें|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

साक़ी भी है, शराब भी, आज़ादियाँ भी हैं!

साक़ी भी है, शराब भी, आज़ादियाँ भी हैं,
सब कुछ है इंतज़ाम, चलो मयकदे चलें|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

-लेकर ख़ुदा का नाम, चलो–

यारो जो होगा देखेंगे, ग़म से तो हो निजात,
लेकर ख़ुदा का नाम, चलो मयकदे चलें|

कृष्ण बिहारी ‘नूर

जीना न हो हराम!

अच्छा, नहीं पियेंगे जो पीना हराम है,
जीना न हो हराम, चलो मयकदे चलें|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

खुल के जहाँ बात हो सके!

दैरो-हरम पे खुल के जहाँ बात हो सके,
है एक ही मुक़ाम, चलो मयकदे चलें|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

चलो मयकदे चलें!

यारो घिर आई शाम, चलो मयकदे चलें,
याद आ रहे हैं जाम, चलो मयकदे चलें|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

इस नगरी क्यूँ आये थे!

रुख़्सत के दिन भीगी आँखों उसका वो कहना हाए “क़तील”,
तुम को लौट ही जाना था तो इस नगरी क्यूँ आये थे|

क़तील शि
फ़ाई

पेड़ पे बैठी इक चिड़िया ने—

कैसा प्यारा मंज़र था जब देख के अपने साथी को,
पेड़ पे बैठी इक चिड़िया ने अपने पर फैलाये थे|

क़तील शिफ़ाई