मुद्दतों से ये आलम न तवक़्क़ो न उम्मीद!

मुद्दतों से ये आलम न तवक़्क़ो न उम्मीद,
दिल पुकारे ही चला जाता है जाना जाना|

अहमद फ़राज़

तेरा चेहरा था गुलिस्ताँ जाना!

अव्वल-अव्वल की मुहब्बत के नशे याद तो कर,
बे-पिये भी तेरा चेहरा था गुलिस्ताँ जाना|

अहमद फ़राज़

तेरा एहसां जाना!

ज़िन्दगी तेरी अता थी सो तेरे नाम की है,
हमने जैसे भी बसर की तेरा एहसां जाना|

अहमद फ़राज़

तेरा पैमां जाना!

अब के तज्दीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जाना,
याद क्या तुझ को दिलाएँ तेरा पैमां जाना|

अहमद फ़राज़

कोई फ़ैसला तो सुना दें!

सज़ा दें, सिला दें, बना दें, मिटा दें
मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें

सुदर्शन फ़ाकिर

चलो उनके चहरे से पर्दा हटा दें!

क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे,
चलो उनके चहरे से पर्दा हटा दें|

सुदर्शन फ़ाकिर

वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें!

कभी ग़म की आँधी, जिन्हें छू न पाए,
वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें|

सुदर्शन फ़ाकिर

चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें!

अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले,
कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें|

सुदर्शन फ़ाकिर

चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें!

हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें,
चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें|

सुदर्शन फ़ाकिर