कामयाब होने पे मुझ को बधाई दे!

ऐ काश इस मक़ाम पे पहुँचा दे उसका प्यार,
वो कामयाब होने पे मुझ को बधाई दे|

कृष्ण बिहारी नूर

पुकारूँ मैं तो उसी को सुनाई दे!

काश ऐसा ताल-मेल सुकूत-ओ-सदा में हो,
उसको पुकारूँ मैं तो उसी को सुनाई दे|

कृष्ण बिहारी नू

निगाह को ऐसी रसाई दे!

देना है तो निगाह को ऐसी रसाई दे,
मैं देखता हूँ आइना तो मुझे तू दिखाई दे|

कृष्ण बिहारी नूर

हुस्न सबको ख़ुदा नहीं देता!

हुस्न सबको ख़ुदा नहीं देता,
हर किसी की नज़र नहीं होती|

इब्न ए इंशा

ज़िंदगी मुख़्तसर नहीं होती!

बे-क़रारी सही नहीं जाती,
ज़िंदगी मुख़्तसर नहीं होती|

इब्न ए इंशा

इक हमारी सहर नहीं होती!

रात आ कर गुज़र भी जाती है,
इक हमारी सहर नहीं होती|

इब्न ए इंशा

क्या ख़ता दरगुज़र नहीं होती!

दोस्तो इश्क़ है ख़ता लेकिन,
क्या ख़ता दरगुज़र नहीं होती|

इब्न ए इंशा

इस तरफ़ है उधर नहीं होती!

एक जाँ-सोज़ ओ ना-मुराद ख़लिश,
इस तरफ़ है उधर नहीं होती|

इब्न ए इंशा

कोई शय नामा-बर नहीं होती!

चाँद है कहकशाँ है तारे हैं,
कोई शय नामा-बर नहीं होती|

इब्न ए इंशा