मेरी आँख में आना नहीं आता!

ढूँढे है तो पलकों पे चमकने के बहाने,
आँसू को मेरी आँख में आना नहीं आता|

वसीम बरेलवी

मुझे छोड़ के जाना नहीं आता!

मैं भी उसे खोने का हुनर सीख न पाया,
उसको भी मुझे छोड़ के जाना नहीं आता|

वसीम बरेलवी

क्यूँ वो ज़माना नहीं आता!

पहुँचा है बुज़ुर्गों के बयानों से जो हम तक,
क्या बात हुई क्यूँ वो ज़माना नहीं आता|

वसीम बरेलवी

अंदाज़ा लगाना नहीं आता!

दुख अपना अगर हमको बताना नहीं आता,
तुमको भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता|

वसीम बरेलवी

ऐसे तुझे कौन गुज़रने देगा!

सब से जीती भी रहे सब की चहेती भी रहे,
ज़िन्दगी ऐसे तुझे कौन गुज़रने देगा|

वसीम बरेलवी

मुझे कौन उभरने देगा!

डूब जाने को, जो तक़दीर समझ बैठे हों,
ऐसे लोगों में मुझे कौन उभरने देगा|

वसीम बरेलवी

हदें पार न करने देगा!

प्यार तहज़ीब-ए-तअल्लुक़ का अजब बंधन है,
कोई चाहे, तो हदें पार न करने देगा।

वसीम बरेलवी

बुलंदी से तुम्हें कौन उतरने देगा!

ख़ाक़-ए-पा हो के मिलो, जिससे मिलो, फिर देखो,
इस बुलंदी से तुम्हें कौन उतरने देगा।

वसीम बरेलवी

गहराई का अंदाज़ा न करने देगा!

कैसा दरिया है कि प्यासा तो न मरने देगा,
अपनी गहराई का अंदाज़ा न करने देगा|

वसीम बरेलवी

मेहमानी भी मेज़बानी भी!

पास रहना किसी का रात की रात,
मेहमानी भी मेज़बानी भी।

फ़िराक़ गोरखपुरी