जो हम पे गुज़री सो गुज़री!

जो हम पे गुज़री सो गुज़री मगर शब-ए-हिज्राँ,
हमारे अश्क तेरी आकबत सँवार चले|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज ज़िक्र-ए-यार चले!

क़फ़स उदास है यारो सबा से कुछ तो कहो,
कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गुलशन का कारोबार चले!

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले,
चले भी आओ के गुलशन का कारोबार चले|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हवा, ख़ुश्बू, ज़मीनो-आसमाँ!

सब उसी के हैं हवा, ख़ुश्बू, ज़मीनो-आसमाँ,
मैं जहाँ भी जाऊँगा, उसको पता हो जाएगा|

बशीर बद्र

दवा हो जाएगा!

मैं ख़ुदा का नाम लेकर पी रहा हूँ दोस्तो,
ज़हर भी इसमें अगर होगा, दवा हो जाएगा|

बशीर बद्र

कोई दूसरा हो जाएगा!

कितनी सच्चाई से मुझसे ज़िन्दगी ने कह दिया,
तू नहीं मेरा, तो कोई दूसरा हो जाएगा|

बशीर बद्र

हम भी दरिया हैं!

हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है,
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा|

बशीर बद्र

सर झुकाओगे तो पत्थर!

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा,
इतना मत चाहो उसे, वो बेवफ़ा हो जाएगा|

बशीर बद्र

कैसे जलता हुआ रह गया!

आंधियों के इरादे तो अच्छे ना थे,
ये दिया कैसे जलता हुआ रह गया|

वसीम बरेलवी