वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें!

कभी ग़म की आँधी, जिन्हें छू न पाए,
वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें|

सुदर्शन फ़ाकिर

चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें!

अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले,
कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें|

सुदर्शन फ़ाकिर

चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें!

हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें,
चलो ज़िंदगी को मोहब्बत बना दें|

सुदर्शन फ़ाकिर

कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी!

कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी,
एक तस्लीम लाज़मी सी है|


गुलज़ार

शीश-महल में एक एक चेहरा!

किसको पत्थर मारूँ ‘क़ैसर’ कौन पराया है,
शीश-महल में एक एक चेहरा अपना लगता है|

क़ैसर उल जाफ़री

इस सूने घर में मेला लगता है!

दुनिया भर की यादें हम से मिलने आती हैं,
शाम ढले इस सूने घर में मेला लगता है|

क़ैसर उल जाफ़री

सबका दामन भीगा लगता है!

इस बस्ती में कौन हमारे आंसू पोंछेगा,
जो मिलता है उसका दामन भीगा लगता है|

क़ैसर उल जाफ़री