रुक जा रात ठहर जा रे चंदा!

स्वर्गीय शैलेन्द्र जी का एक सुंदर गीत आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| फिल्म- ‘दिल एक मंदिर’ के लिए इस गीत का संगीत शंकर जयकिशन की सुरीली जोड़ी ने दिया था और सुर सम्राज्ञी स्वर्गीय लता मंगेशकर जी ने अपनी मधुर वाणी में गाकर इस गीत को अमर कर दिया है|

लीजिए आज प्रस्तुत हैं इस मधुर गीत के बोल –

रुक जा रात ठहर जा रे चंदा
बीते न मिलन की बेला,
आज चांदनी की नगरी में
अरमानों का मेला|
रुक जा रात …

पहले मिलन की यादें लेकर
आई है ये रात सुहानी
दोहराते हैं चाँद सितारे
मेरी तुम्हारी प्रेम कहानी|
मेरी तुम्हारी प्रेम कहानी||
रुक जा रात …

कल का डरना काल की चिंता
दो तन है मन एक हमारे
जीवन सीमा के आगे भी
आऊँगी मैं संग तुम्हारे|
आऊँगी मैं संग तुम्हारे|
रुक जा रात …

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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मैं नशे में हूँ 2

ढल चुकी है रात कब की, उठ गई महफ़िल,
मैं कहाँ जाऊं नहीं मेरी कोई मंजिल,
दो क़दम मुश्किल है चलना
मैं नशे में हूँ!

मैं नशे में हूँ 1

है ज़रा सी बात और छलके हैं कुछ प्याले,
पर न जाने क्या कहेंगे ये जहां वाले,
तुम बस इतना याद रखना, मैं नशे में हूँ!

मैं नशे में हूँ!

कल की यादें मिट चुकी हैं, दर्द भी है कम,
अब ज़रा आराम से आ जा रहा है दम,
कम है अब दिल का तड़पना, मैं नशे में हूँ!