लौ को ज़रा सा कम कर दे!

चमकने वाली है तहरीर मेरी क़िस्मत की,
कोई चिराग़ की लौ को ज़रा सा कम कर दे|

बशीर बद्र

उसे जिस्म बनाकर देखो!

वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में,
क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो |

निदा फ़ाज़ली