लौटे हैं हर इक दुकाँ से हम!

ग़म बिक रहे थे मेले में ख़ुशियों के नाम पर,
मायूस होक लौटे हैं हर इक दुकाँ से हम|

राजेश रेड्डी

अच्छी-सी जगह ढूंढ रहे हैं!

ईमां की तिजारत के लिए इन दिनों हम भी,
बाज़ार में अच्छी-सी जगह ढूंढ रहे हैं|

राजेश रेड्डी