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लंदन में शॉपिंग का एक और दिन!

दो वर्षों में किए गए लंदन प्रवास के जो अनुभव मैं शेयर कर रहा था, आज उसकी अंतिम कड़ी है, अर्थात अगस्त-सितंबर में डेढ़ माह के लंदन प्रवास से संबंधित यह अंतिम आलेख है, लीजिए इसको भी झेल लीजिए|

इस वर्ष के लंदन प्रवास का आज अंतिम रविवार था। यह तो निश्चित ही है कि विज़िट करने और कराने वालों में महिलाएं भी हों तो कुछ समय तो शॉपिंग को भी देना ही पड़ता है। वैसे एक-दो बार छिटपुट शॉपिंग पहले भी हो चुकी है, एक दिन तो ‘ओ-2’ में ही लंच और उसके बाद शॉपिंग की गई थी। ‘ओ-2’ जिसे लंदन का आधुनिकतम ईवेंट-प्लेस और शॉपिंग मॉल कह सकते हैं। उसके अलावा अपने घर के पास ही ‘कैनरी व्हार्फ’ स्टेशन के पास अत्याधुनिक मॉल हैं, वे शायद कुछ महंगे तो हैं, वहाँ से भी शॉपिंग की जा चुकी थी। और भी एक-दो विशाल मॉल्स में हम गए थे, जिनमें से एक तो ‘ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट’ स्टेशन के पास था, उसका ज़िक्र भी मैंने एक ब्लॉग-पोस्ट में किया है, वहाँ भी भारतीय सामान और भोजन के भरपूर विकल्प मौज़ूद थे।

आज शॉपिंग को निपटाने के लिए ‘वेस्टफील्ड’ मॉल, एक्ल्स्लूसिव शॉपिंग अभियान को संपन्न करने के लिए चुना गया। यह मॉल ‘स्ट्रैटफोर्ड स्टेशन’ के पास है, जो ‘डीएलआर’ और ‘जुबली लाइन’, दोनो में एक तरफ का अंतिम स्टेशन है, वैसे यहाँ नेशनल रेलवे और एक और लाइन का स्टेशन भी है, इस तरह भारतीय पैमानों से इसे जंक्शन तो कह ही सकते हैं।

हाँ तो शॉपिंग में तो मेरी भूमिका शून्य रहती है, मैं यह भी पसंद करता हूँ कि मैं एक स्थान पर बैठकर बाजार को देखता रहूं। खैर रेडीमेड कपड़ों की कुछ दुकानों में मैं गया, तीन-तीन मंज़िलों में और इतने क्षेत्र में फैली दुकानें, जितने में कुछ छोटे-मोटे मॉल पूरे आ जाते हैं। मॉल की विशालता देखकर मुझे ‘दुबई मॉल’ याद आ गया, हालांकि यह उतना बड़ा तो नहीं ही होगा लेकिन भव्यता में कहीं कम नहीं था।

वैसे मैं यह भी कह दूं कि हमारे भारतवर्ष में भी आज एक से एक सुंदर ‘मॉल’ मौज़ूद हैं। हर देश अपनी संस्कृति, विरासत, शिल्पकला आदि-आदि के साथ अपने बाजारों से भी दुनिया को आकर्षित करता है और मैं समझता हूँ कि बाजार की संस्कृति को भी हमने बहुत अच्छी तरह अपनाया है, और हम इस मामले में भी दुनिया को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

हाँ तो शॉपिंग के बारे में तो मुझे ज्यादा कुछ नहीं कहना है, जो खरीदारों को खरीदना था, उन्होंने खरीद लिया, मेरी स्थिति तो वही थी चचा गालिब के शब्दों में ‘बाज़ार से गुज़रा हूँ, खरीदार नहीं हूँ।

हाँ ये जरूर है कि अगर आप बाज़ार को जानते हैं तो आपको अधिकांश प्रमुख जगहों पर भारतीय भोजन का विकल्प भी मिल जाएगा। उस मॉल के ही, ‘फूड कोर्ट’ में हमने एक दुकान देखी जिसका नाम था ‘इंडि-गो’ और वहाँ भारतीय व्यंजनों के अनेक विकल्प दिख रहे थे, जिनमें समोसा चाट, पूरी आदि-आदि अनेक डिश शामिल थीं, शायद और भी दुकानें होंगी, लेकिन हमने वहाँ खाना नहीं खाया।

हम वहाँ से लौटकर अपने घर के पास वाले स्टेशन ‘कैनरी व्हार्फ’ आए और यहाँ बगल के मॉल में, जिस दुकान पर हमने खाना खाया उसका नाम था- ‘चाय की’ (chai Ki), यहाँ पर हमने सभी भारतीय डिश ऑर्डर कीं और वे बड़ी स्वादिष्ट भी थीं, जिनमें इडली, मलाबर पराठा, पनीर टिक्का आदि शामिल थे।

इसके बाद हम शायद इस पड़ाव की अंतिम आउटिंग के बाद अपने घर लौट आए, जो कुछ फोटो खींच पाया, उनको शेयर करने का प्रयास कर रहा हूँ। एक फोटो अंत में ASDA मार्केट का दाल दिया है|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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एक बार फिर ओ-2 !

जैसा आप जानते हैं, इन दिनों मैं अगस्त-सितंबर 2019 में किए गए हमारे दूसरे लंदन प्रवास के अनुभव शेयर कर रहा हूँ| अब यह क्रम भी शीघ्र समाप्त होने वाला है और जल्दी ही मुझे अपने नियमित कार्यक्रम को फिर से अपनाना होगा| प्रस्तुत है आज का प्रसंग|

आज की हमारी मंज़िल थी- ओ-2, यह आप समझ लीजिए कि मार्केट-कम-ईवेंट ऑर्गेनाइज़ेशन प्लेस है। लंदन ओलंपिक्स के दौरान इसे बनाया गया था। हमारे घर से यहाँ आने के लिए थेम्स नदी के नीचे से ट्यूब रेल द्वारा एक अगले स्टेशन पर जाना होता है। इसको आप ऐसा समझ लीजिए कि एक ही छत के नीचे पूरा कनॉट-प्लेस है, बहुत सुंदर सज्जा के साथ, एक छत के नीचे ऐसे जैसे गुड़गांव में ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ है। हाँ छत को यहाँ आकाश का रूप नहीं दिया गया है।

यहाँ जैसे मुख्य बाज़ारों में होता है आपको सब कुछ मिल जाएगा, ब्रांडेड सामान, फैंसी सामान, मुझे तो वैसे खरीदारी का अनुभव नहीं है लेकिन यहाँ से मेरे बेटा-बहू ने हमारे लिए काफी कुछ खरीदा। यहाँ सिनमा हॉल तो हैं ही, ईवेंट भी होते रहते हैं, जैसे आज ही सुनिधि चौहान का कार्यक्रम शाम को हुआ होगा, हम तो खैर दिन में गए थे।

यहाँ खाने-पीने का भी पूरा एक बाज़ार है और हाँ उसमें दो-तीन दुकानें तो भारतीय भोजन भी प्रदान करती हैं। एक जिसमें हम गए, ‘जिमी’ज़ वर्ल्ड ग्रिल एंड बार’, बहुत शानदार रेस्टोरेंट था, ‘बार्बे क्यू नेशन’ की तरह, बफे सिस्टम वाला और यहाँ बहुत स्वादिष्ट भारतीय पकवानों की विशाल रेंज उपलब्ध थी, इतनी कि मैं वास्तव में ज्यादा खा गया, और फिर मीठे का तो मुझे विशेष शौक है, उसने भी भोजन की मात्रा बढ़ा दी। स्टॉफ में काफी लोग भारतीय और एशियाई थे।

विशेष रूप से रेस्टोरेंट में भारतीय झंडा भी लगा था और सजावट बहुत आकर्षक थी। मेरा बेटा बता रहा था कि काफी दिन से उसका यहाँ आने का विचार था, जो आज क्रियान्वित हो गया। जैसा मैंने बताया सुनिधि चौहान का भी आज वहाँ प्रोग्राम था।

खाने के बाद हम खरीदारी के लिए ऊपर गए और इस मार्केट-प्लेस का यह हिस्सा इस वर्ष ही चालू किया गया है, मार्केट को स्टूडियो की तरह सजाया गया है और यहाँ सफाई तो रहती ही है।

वापसी में ओ-2 मार्केट के बाहर ही ‘ऑटम फेस्टिवल’ के अंतर्गत स्टॉल लगे थे, उनको देखा। यहाँ की गर्मी तो हमारे लिए हल्की सर्दी जैसी होती है, ऑटम उससे कुछ ज्यादा और फिर सर्दी तो आखिर सर्दी ही है!


वैसे तो मैं ओ-2 मार्केट प्लेस में कई बार गया हूँ लेकिन आज का यहाँ का खाना और खरीदारी कुछ ज्यादा ही मजेदार थीं। जैसा इसका नाम है ‘ओ-2’ यह वास्तव जीवन में ऑक्सीजन की तरह है।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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साउथहॉल- लंदन का लाजपत नगर!

आज फिर से रविवार का दिन था और लंदन में फिर से बाहर निकलने का प्रोग्राम बना। हालांकि आजकल बारिश यहाँ भी हिंदुस्तान से हमारे साथ चली आई है, इसलिए देखना पड़ता है कि कब निकल सकते हैं।

आज दिन था साउथहॉल का, जहाँ पहुंचकर लगता है कि हम भारत में ही आ गए हैं, बल्कि वहाँ अचानक पहुंचकर किसी अंग्रेज को यह लग सकता है कि वह कहाँ पहुंच गया है!

आज साउथहॉल जाने का प्रोग्राम बना, बच्चों ने इसे लाजपत नगर का नाम दिया हुआ है। कल हम ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट गए थे, जिसे चांदनी चौक जैसा कहा था, क्योंकि वह शायद यूरोप के व्यस्ततम बाजारों में से एक है, चांदनी चौक की तरह और वहाँ अगर आपको मालूम है तो आप अपनी पसंद का हर सामान खरीद सकते हैं।


तीन लोकल लाइनों से सफर करने के बाद जब साउथहॉल स्टेशन से बाहर निकले तो सबसे पहले गुरुद्वारा दिखाई दिया, यहाँ मंदिर भी हैं और आपको अधिकतम हिंदुस्तानी दिखाई देंगे, भारतीय बैंक दिखेंगे, दुकानों के नामों में आप जाने-पहचाने भारतीय नाम देखते जाएंगे- अनुराग, दीपक, मीना, परंपरा आदि-आदि, हमारे सिख साथी वैसे तो दुनिया के हर हिस्से में दिखाई दे जाते हैं, लेकिन यहाँ काफी अधिक संख्या में दिखाई दे जाएंगे।

भारतीय खाना खाने के लिए हम यहाँ जिस रेस्टोरेंट में गए, उसका नाम था- चांदनी चौक रेस्टोरेंट, वैसे वहाँ शेर-ए-पंजाब और न जाने कितने ही रेस्टोरेंट, ढाबे आदि भारतीय नाम वाले हैं, भारतीय सामान, सब्जियां, मसाले आदि के लिए यहाँ बड़े-बड़े स्टोर हैं, जिनमें आपको सब भारतीय, या कहें कि एशियाई भी मिलेंगे, अंग्रेज तो कुछ भूले-भटके ही मिलेंगे। आपका अंग्रेजी में अगर हाथ तंग है तो यहाँ आप बिंदास हिंदी बोलकर अपना काम चला सकते हैं।

सभी प्रकार की भारतीय सामग्री, खाना और यहाँ तक कि समोसे और मिठाई भी- गुलाब जामुन, हलवा और क्या नहीं, यहाँ तक कि जलेबी के लिए तो अलग से ‘जलेबी जंक्शन’ नाम की दुकान है।


जब भी कभी आपको लंदन में रहते हुए भारतीय सामान खरीदना हो, भारतीय खाना खाना हो, अपने चारों तरफ हिंदुस्तान देखना हो, भारतीय नाम और किसी हद तक ट्रैफिक की अव्यवस्था भी, हॉर्न बजाती गाड़ियां आदि-आदि तो आप किसी दिन साउथहॉल पधार सकते हैं।

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।

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लंदन में शॉपिंग का एक और दिन!

इस वर्ष के लंदन प्रवास का आज अंतिम रविवार था। यह तो निश्चित ही है कि विज़िट करने और कराने वालों में महिलाएं भी हों तो कुछ समय तो शॉपिंग को भी देना ही पड़ता है। वैसे एक-दो बार छिटपुट शॉपिंग पहले भी हो चुकी है, एक दिन तो ‘ओ-2’ में ही लंच और उसके बाद शॉपिंग की गई थी। ‘ओ-2’ जिसे लंदन का आधुनिकतम ईवेंट-प्लेस और शॉपिंग मॉल कह सकते हैं। उसके अलावा अपने घर के पास ही ‘कैनरी व्हार्फ’ स्टेशन के पास अत्याधुनिक मॉल हैं, वे शायद कुछ महंगे तो हैं, वहाँ से भी शॉपिंग की जा चुकी थी। और भी एक-दो विशाल मॉल्स में हम गए थे, जिनमें से एक तो ‘ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट’ स्टेशन के पास था, उसका ज़िक्र भी मैंने एक ब्लॉग-पोस्ट में किया है, वहाँ भी भारतीय सामान और भोजन के भरपूर विकल्प मौज़ूद थे।

 

 

आज शॉपिंग को निपटाने के लिएलिए ‘वेस्टफील्ड’ मॉल, एक्ल्स्लूसिव शॉपिंग अभियान को संपन्न करने के लिए चुना गया। यह मॉल ‘स्ट्रैटफोर्ड स्टेशन’ के पास है, जो ‘डीएलआर’ और ‘जुबली लाइन’, दोनो में एक तरफ का अंतिम स्टेशन है, वैसे यहाँ नेशनल रेलवे और एक और लाइन का स्टेशन भी है, इस तरह भारतीय पैमानों से इसे जंक्शन तो कह ही सकते हैं।

 

हाँ तो शॉपिंग में तो मेरी भूमिका शून्य रहती है, मैं यह भी पसंद करता हूँ कि मैं एक स्थान पर बैठकर बाजार को देखता रहूं। खैर रेडीमेड कपड़ों की कुछ दुकानों में मैं गया, तीन-तीन मंज़िलों में और इतने क्षेत्र में फैली दुकानें, जितने में कुछ छोटे-मोटे मॉल पूरे आ जाते हैं। मॉल की विशालता देखकर मुझे ‘दुबई मॉल’ याद आ गया, हालांकि यह उतना बड़ा तो नहीं ही होगा लेकिन भव्यता में कहीं कम नहीं था।

 

 

वैसे मैं यह भी कह दूं कि हमारे भारतवर्ष में भी आज एक से एक सुंदर ‘मॉल’ मौज़ूद हैं। हर देश अपनी संस्कृति, विरासत, शिल्पकला आदि-आदि के साथ अपने बाजारों से भी दुनिया को आकर्षित करता है और मैं समझता हूँ कि बाजार की संस्कृति को भी हमने बहुत अच्छी तरह अपनाया है, और हम इस मामले में भी दुनिया को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

 

हाँ तो शॉपिंग के बारे में तो मुझे ज्यादा कुछ नहीं कहना है, जो खरीदारों को खरीदना था, उन्होंने खरीद लिया, मेरी स्थिति तो वही थी चचा गालिब के शब्दों में ‘बाज़ार से गुज़रा हूँ, खरीदार नहीं हूँ।

 

हाँ ये जरूर है कि अगर आप बाज़ार को जानते हैं तो आपको अधिकांश प्रमुख जगहों पर भारतीय भोजन का विकल्प भी मिल जाएगा। उस मॉल के ही, ‘फूड कोर्ट’ में हमने एक दुकान देखी जिसका नाम था ‘इंडि-गो’ और वहाँ भारतीय व्यंजनों के अनेक विकल्प दिख रहे थे, जिनमें समोसा चाट, पूरी आदि-आदि अनेक डिश शामिल थीं, शायद और भी दुकानें होंगी, लेकिन हमने वहाँ खाना नहीं खाया।

 

 

हम वहाँ से लौटकर अपने घर के पास वाले स्टेशन ‘कैनरी व्हार्फ’ आए और यहाँ बगल के मॉल में, जिस दुकान पर हमने खाना खाया उसका नाम था- ‘चाय की’ (chai Ki), यहाँ पर हमने सभी भारतीय डिश ऑर्डर कीं और वे बड़ी स्वादिष्ट भी थीं, जिनमें इडली, मलाबर पराठा, पनीर टिक्का आदि शामिल थे।

इसके बाद हम शायद इस पड़ाव की अंतिम आउटिंग के बाद अपने घर लौट आए, जो कुछ फोटो खींच पाया, उनको शेयर करने का प्रयास कर रहा हूँ।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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