कश्ती को उछाला दे दूँ!

डूबते डूबते कश्ती को उछाला दे दूँ,
मैं नहीं कोई तो साहिल पे उतर जाएगा|

अहमद फ़राज़

मगर नाख़ुदा के साथ!

गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो,
डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ|

कैफ़ी आज़मी