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निद्रा- रवींद्रनाथ ठाकुर

आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘Sleep’ का भावानुवाद-

 

 

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

 

 

निद्रा

 

थकान भरी रात में
मैंने  स्वयं को नींद के हवाले किया , बिना कोई संघर्ष किए,
अपना पूरा भरोसा तुम पर रखते हुए|
मुझे अपनी शिथिल आत्मा को विवश नहीं करना है , तुम्हारी अर्चना की कमजोर तैयारी के लिए|
यह तुम ही हो, जो दिन की थकान भारी आँखों पर, रात का पर्दा दाल देते हो,
जिससे उसकी दृष्टि, जागृति के नवीनता भरे तरोताजा हर्ष से ओतप्रोत हो जाए|

-रवींद्रनाथ ठाकुर

 

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-

 

Sleep

 

In the night of weariness
let me give myself up to sleep without struggle,
resting my trust upon thee.
Let me not force my flagging spirit into a poor preparation for thy worship.
It is thou who drawest the veil of night upon the tired eyes of the day
to renew its sight in a fresher gladness of awakening.

 

-Rabindranath Tagore

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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