बंद ख़्वाब अगर खुल के आ गए!

नींदों से जंग होती रहेगी तमाम उम्र,
आँखों में बंद ख़्वाब अगर खुल के आ गए|

राहत इन्दौरी

रात है नींद है कहानी है!

कुछ न पूछो ‘फ़िराक़’ अहद-ए-शबाब,
रात है नींद है कहानी है|

फ़िराक़ गोरखपुरी

नींद उड़ा देनी चाहिए!

मैं ख़्वाब हूँ तो ख़्वाब से चौंकाइए मुझे,
मैं नींद हूँ तो नींद उड़ा देनी चाहिए|

राहत इंदौरी

ख़्वाब अगली सदी के देखते हैं!

नींद पिछली सदी की ज़ख़्मी है,
ख़्वाब अगली सदी के देखते हैं|

राहत इन्दौरी

मगर नींद भी न आई हो!

वो तो सोते जागते रहने के मौसमों का फुसूँ,
कि नींद में हों मगर नींद भी न आई हो|

परवीन शाकिर

उनमें नींद पराई है!

यों लगता है सोते जागते औरों का मोहताज हूँ मैं,
आँखें मेरी अपनी हैं पर उनमें नींद पराई है|

क़तील शिफ़ाई

नींद टूटी तो फिर नहीं आई!

नींद टूटी तो फिर नहीं आई,
क्या बताएँ कि ख़्वाब क्या देखा !

नक़्श लायलपुरी

मेरी छत पे टहलते क्यों हैं!

नींद से मेरा त’अल्लुक़ ही नहीं बरसों से,
ख्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं|

राहत इन्दौरी