ये दर्द जागता क्यूँ है!

कहानियों की गुज़रगाह पर भी नींद नहीं,
ये रात कैसी है ये दर्द जागता क्यूँ है |

राही मासूम रज़ा

हम भी सो ही जायेंगे!

हमें भी नींद आ जायेगी हम भी सो ही जायेंगे,
अभी कुछ बेक़रारी है सितारों तुम तो सो जाओ|

क़तील शिफ़ाई

मगर नींद भी न आई हो!

वो तो सोते जागते रहने के मौसमों का फुसूँ,
कि नींद में हों मगर नींद भी न आई हो|

परवीन शाकिर

न वो ख़्वाब ही तेरा ख़्वाब था!

न वो आँख ही तेरी आँख थी, न वो ख़्वाब ही तेरा ख़्वाब था,
दिले मुन्तज़िर तो है किसलिए, तेरा जागना उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

करवटें, बेताबियाँ, अँगड़ाइयाँ!

क्या ज़माने में यूँ ही कटती है रात,
करवटें, बेताबियाँ, अँगड़ाइयाँ|

कैफ़ भोपाली

जिनमें नींद ना आए!

क्‍या वो दिन भी दिन हैं, जिनमें दिन भर जी घबराए
क्‍या वो रातें भी रातें हैं जिनमें नींद ना आए।

राही मासूम रज़ा

हमें भी नींद आ जायेगी हम भी सो ही जायेंगे!

हमें भी नींद आ जायेगी हम भी सो ही जायेंगे,
अभी कुछ बेक़रारी है सितारों तुम तो सो जाओ|

क़तील शिफ़ाई

यही क़िस्मत हमारी है सितारों तुम तो सो जाओ!

हमें तो आज की शब पौ फटे तक जागना होगा,
यही क़िस्मत हमारी है सितारों तुम तो सो जाओ|

क़तील शिफ़ाई

ये बाज़ी हमने हारी है सितारों तुम तो सो जाओ!

तुम्हें क्या आज भी कोई अगर मिलने नहीं आया,
ये बाज़ी हमने हारी है सितारों तुम तो सो जाओ|

क़तील शिफ़ाई