मेहनत का दाम हो गई है!

हज़ारों आँसुओं के बअ’द इक ज़रा सी हँसी,
किसी ग़रीब की मेहनत का दाम हो गई है|

राजेश रेड्डी

छुप गया अपने ग़मों का हाल भी!

उसकी सुख़न-तराज़ियाँ मेरे लिए भी ढाल थीं,
उसकी हँसी में छुप गया अपने ग़मों का हाल भी|

परवीन शाकिर

अब ‘मुल्ला’ को कहना आ गया!

लब पे नग़्मा और रुख़ पर इक तबस्सुम की नक़ाब,
अपने दिल का दर्द अब ‘मुल्ला’ को कहना आ गया|

आनंद नारायण मुल्ला

किरन फूल की पत्तियों में दबी!

किरन फूल की पत्तियों में दबी,
हँसी उस के होंठों पे आई हुई|

बशीर बद्र

मुस्कुरा के बात करे आश्ना लगे!

वो क़हर दोस्ती का पड़ा है कि इन दिनों,
जो मुस्कुरा के बात करे आश्ना लगे|

क़तील शिफ़ाई

मुस्कुराने वाले थे!

भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे,
हम आँसुओं की तरह मुस्कुराने वाले थे|

वसीम बरेलवी

वो ख़ंजर लेके आया है!

तबस्सुम उसके होठों पर है उसके हाथ में गुल है,
मगर मालूम है मुझको वो ख़ंजर लेके आया है|

राजेश रेड्डी

गम छुपाने के लिए भी!

हो खुशी भी उनको हासिल ये ज़रूरी तो नहीं,
गम छुपाने के लिए भी मुस्कुरा लेते हैं लोग|

क़तील शिफ़ाई

किस्मत में ईनाम नहीं होता!

हँस- हँस के जवां दिल के, हम क्यों न चुनें टुकडे़,
हर शख्स़ की किस्मत में ईनाम नहीं होता|

मीना कुमारी

बच्चों की कापी में इबारत सी!

हँसी मासूम सी बच्चों की कापी में इबारत सी,
हिरन की पीठ पर बैठे परिन्दे की शरारत सी|

बशीर बद्र