कहीं तिश्नगी बेहिसाब है!

कहीं आँसुओं की है दास्ताँ, कहीं मुस्कुराहटों का बयाँ,
कहीं बर्क़तों की है बारिशें कहीं तिश्नगी बेहिसाब है|

राजेश रेड्डी

मौत का मंतर न फेंक!

हो सके तो चल किसी की आरजू के साथ-साथ,
मुस्कराती ज़िंदगी पर मौत का मंतर न फेंक|

कुंवर बेचैन