दिल बोने की कोशिश की!

एक धुएँ का मर्ग़ोला सा निकला है,
मिट्टी में जब दिल बोने की कोशिश की|

गुलज़ार

आ के फूँक दो उड़ता नहीं धुआँ!

चिंगारी इक अटक सी गई मेरे सीने में,
थोड़ा सा आ के फूँक दो उड़ता नहीं धुआँ|

गुलज़ार

चेहरा फेर लेने से छुपता नहीं धुआँ!

आँखों के पोछने से लगा आग का पता,
यूँ चेहरा फेर लेने से छुपता नहीं धुआँ|

गुलज़ार

जल रहा है प बुझता नहीं धुआँ!

आँखों में जल रहा है प बुझता नहीं धुआँ,
उठता तो है घटा सा बरसता नहीं धुआँ|

गुलज़ार

न पूरे शहर पर छाए तो कहना!

धुआँ जो कुछ घरों से उठ रहा है,
न पूरे शहर पर छाए तो कहना|

जावेद अख़्तर

नहीं हो तो बुझ जाना चाहिए!

बिजली का क़ुमक़ुमा न हो काला धुआँ तो हो,
ये भी अगर नहीं हो तो बुझ जाना चाहिए|

निदा फ़ाज़ली

कोई आसमान थोड़ी है!

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है,
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है|

राहत इन्दौरी

धुआं नहीं मिलता!

बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले,
ये ऐसी आग है जिसमें धुआं नहीं मिलता|

निदा फ़ाज़ली

बुझ गई आस, छुप गया तारा!

बुझ गई आस, छुप गया तारा,
थरथराता रहा धुआं तन्हा|

मीना कुमारी (महज़बीं बानो)