कोई आसमान थोड़ी है!

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है,
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है|

राहत इन्दौरी

धुआं नहीं मिलता!

बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले,
ये ऐसी आग है जिसमें धुआं नहीं मिलता|

निदा फ़ाज़ली

बुझ गई आस, छुप गया तारा!

बुझ गई आस, छुप गया तारा,
थरथराता रहा धुआं तन्हा|

मीना कुमारी (महज़बीं बानो)