ख़ुलूस मिरी आस्तीं से निकलेगा!

मैं जानता था कि ज़हरीला साँप बन बन कर,
तिरा ख़ुलूस मिरी आस्तीं से निकलेगा|

राहत इन्दौरी

फ़ाख़्ता की मजबूरी!

फ़ाख़्ता की मजबूरी ,ये भी कह नहीं सकती,
कौन साँप रखता है, उसके आशियाने में|

बशीर बद्र