समय के विष बुझे नाखून!

सोम ठाकुर जी मेरे प्रिय हिन्दी कवियों में से एक हैं, मेरा सौभाग्य है कि एक श्रोता और एक आयोजक के रूप में भी मुझे उनसे अनेक बार मिलने का अवसर प्राप्त हुआ और मैंने उनके बहुत से गीत पहले भी शेयर किए हैं, राष्ट्र प्रेम, भाषा प्रेम, विशुद्ध प्रेम, कौन सा क्षेत्र है जिसमें … Read more

परंपरा

आज राष्ट्रकवि स्वर्गीय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इस रचना में दिनकर जी ने बड़े ही शालीन तरीके से परंपरा और क्रांति दोनों के महत्व और प्रासंगिकता को समझाया है और यह भी बताया है कि दोनों का ही समझदारी के साथ निर्वाह किया जाना चाहिए| इनमें से कुछ … Read more

जब भी जुड़े बांटा गया

निदा फ़ाज़ली साहब मेरे अत्यंत प्रिय शायर रहे हैं, बहुत सुंदर गीत, ग़ज़लें और नज़्में उन्होंने लिखी हैं, दोहे ऐसे-ऐसे कि ‘मैं रोया परदेस में, भीगा माँ का प्यार’, और इसे ग़ज़ल कहें या भजन- ‘गरज, बरस प्यासी धरती पर, फिर पानी दे मौला’, ‘घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें, किसी … Read more

गति,अगति, सद्गति!

आज का समय मानव जाति के लिए बड़ा कठिन है, खास तौर पर कोरोना की यह दूसरी लहर भारतवर्ष के लिए बड़े कष्ट लेकर आई है| पहली लहर के समय हम कहते थे कि बाहर से लोगों को क्यों आने दे रहे हैं! आज दूसरे अनेक देश भारत से लोगों का वहाँ जाना प्रतिबंधित कर … Read more

अक्कड़ मक्कड़, धूल में धक्कड़!

स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी बातचीत के लहजे में कविता लिखने के लिए प्रसिद्ध थे| उनके एक संकलन का नाम था ‘बुनी हुई रस्सी’, जिसका आशय है की वे कविता में रस्सी जैसी बुनावट की अपेक्षा रकहते थे| अपने मुंबई जाने के अनुभव को लेकर उन्होंने एक रचना लिखी थी- ‘जी हाँ हुज़ूर, मैं गीत … Read more

तरक्की के पैमाने!

आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है और मैं 2018 में हुई एक दुखद घटना की प्रतिक्रियास्वरूप लिखी अपनी एक पोस्ट, फिर से शेयर कर रहा हूँ| आज हम वर्ष 2018 में जी रहे हैं, सुना है हिंदुस्तान दुनिया की बड़ी ताक़त बन गया, आर्थिक शक्तिसंपन्न देशों में भारत की गिनती होने लगी है। … Read more

Justice the Princess!

We are living in the greatest democracy in the world, though we might be having some great minds who never find anything positive with our Country. Yes, there are some discrepancies associated with any system or arrangement. One big thing which all modern societies claim is that all are equal before law. Yes, very true, … Read more

जिसको भी पास से देखोगे अकेला होगा!

आज मैं एक बार फिर से अपने प्रिय शायरों में से एक रहे, स्वर्गीय निदा फाज़ली साहब की एक गज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ| निदा साहब अपनी काव्य शैली के अनूठेपन के लिए विख्यात थे, उसके अनेक शेर बरबस होठों पर आ जाते हैं, जैसे – ‘दुनिया जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना है, मिल … Read more

Independence that is – Swaadhintaa!

We are celebrating the 74th Independence of our great nation. The country which has great culture and has been considered the ‘Vishva Guru’. Those who have faith in our rich traditions and culture rejoice by heart on this auspicious day. As a nation we never thought of grabbing the territories of other nations and always … Read more

कैसा मौसम है ये!

आज हम ऐसे समय में चल रहे हैं जिसकी न किसी ने पहले कल्पना की होगी और निश्चित रूप से किसी ने इसकी कामना तो नहीं ही की होगी| जी हाँ कोरोना की महामारी का यह काल, पूरी मानव जाति को इसने त्रस्त करके रखा है| सब यही सोचते रहते हैं कि कब यह दौर … Read more

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