यही जन्नत निशाँ मेरा!

कहीं बारूद फूलों में, कहीं शोले शिगूफ़ों में,
ख़ुदा महफ़ूज़ रक्खे, है यही जन्नत निशाँ मेरा|

बेकल उत्साही

रिश्तेदारों का है मौला खैर!

इस दुनिया में तेरे बाद मेरे सर पर,
साया रिश्तेदारों का है मौला खैर|

राहत इन्दौरी

ये दुनिया सौ रंग दिखाती है!

हर रंग में ये दुनिया सौ रंग दिखाती है,
रोकर कभी हंसती है हंसकर कभी गाती है,
ये प्यार की बाहें हैं या मौत की अंगडाई|

अली सरदार जाफ़री

प्यार की बोली बोले कौन!

लोग अपनों के खूँ में नहाकर, गीता और कुरान पढ़ें,
प्यार की बोली याद है किसको, प्यार की बोली बोले कौन।

राही मासूम रज़ा

मज़ा चखा के ही माना हूँ!

मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को,
समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूंगा उसे|


राहत इन्दौरी

लोग चिल्लाने लगे हैं!

कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं,
गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं|

दुष्यंत कुमार

जख़्म ज़माने से मिले!

दाग दुनिया ने दिए जख़्म ज़माने से मिले,
हम को तोहफे ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले|

कैफ़ भोपाली

हाथ में पत्थर उठा लिए!

दो चार बार हम जो कभी हँस-हँसा लिए,
सारे जहां ने हाथ में पत्थर उठा लिए|

कुंवर बेचैन

हम अपनी पर अड़े हुए हैं!

दुनिया की अपनी इक ज़िद है,
हम अपनी पर अड़े हुए हैं|

राजेश रेड्डी

ऐसे गुज़र होगी नहीं!

पक गई हैं आदतें बातों से सर होंगी नहीं,
कोई हंगामा करो ऐसे गुज़र होगी नहीं|

दुष्यंत कुमार