किसी को ढूँढ़ते हैं हम किसी में!

ये कैसी कश्मकश है ज़िंदगी में,
किसी को ढूँढ़ते हैं हम किसी में|

निदा फ़ाज़ली

जिससे तिरी सूरत नहीं मिलती!

देखा है जिसे मैंने कोई और था शायद,
वो कौन था जिससे तिरी सूरत नहीं मिलती|

निदा फ़ाज़ली

जिससे तेरी सूरत नहीं मिलती!

देखा था जिसे मैंने कोई और था शायद,
वो कौन है जिससे तेरी सूरत नहीं मिलती|

निदा फ़ाज़ली