आतिश-ए-गुलफ़ाम से जल जाते हैं!

बच निकलते हैं अगर आतिश-ए-सय्याद से हम,
शोला-ए-आतिश-ए-गुलफ़ाम से जल जाते हैं|

क़तील शिफ़ाई

भीगी हुई बाती तो है!

एक चिंगारी कहीं से ढूँढ लाओ दोस्तो,
इस दिये में तेल से भीगी हुई बाती तो है|

दुष्यंत कुमार