जिनके मुँह में ज़बान बाक़ी है!

सर क़लम होंगे कल यहाँ उनके,
जिनके मुँह में ज़बान बाक़ी है|

राजेश रेड्डी

चलो बात कर के देखते हैं!

सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं,
ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं|

अहमद फ़राज़

कुछ कांपता रह गया!

आते आते मेरा नाम सा रह गया,
उसके होठों पे कुछ कांपता रह गया|

वसीम बरेलवी