राही भी तमाशाई!

ये फूल से चहरे हैं हँसते हुए गुलदस्ते,
कोई भी नहीं अपना बेगाने हैं सब रस्ते,
राहें हैं तमाशाई राही भी तमाशाई|

अली सरदार जाफ़री