उसे जिस्म बनाकर देखो!

वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में,
क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो |

निदा फ़ाज़ली

बुझ गई आस, छुप गया तारा!

बुझ गई आस, छुप गया तारा,
थरथराता रहा धुआं तन्हा|

मीना कुमारी (महज़बीं बानो)