तुम्हें मैं मिलूँगा जहाँ रात होगी!

चराग़ों की लौ से सितारों की ज़ौ तक,
तुम्हें मैं मिलूँगा जहाँ रात होगी|

बशीर बद्र

रात को चमकाओ किसी दिन!

गुज़रें जो मेरे घर से तो रुक जाएँ सितारे,
इस तरह मिरी रात को चमकाओ किसी दिन|

अमजद इस्लाम अमजद

रात उसे चाँद तकता रहता है!

सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है,
सितारे बाम-ए-फ़लक से उतर के देखते हैं|

अहमद फ़राज़

हम भी सो ही जायेंगे!

हमें भी नींद आ जायेगी हम भी सो ही जायेंगे,
अभी कुछ बेक़रारी है सितारों तुम तो सो जाओ|

क़तील शिफ़ाई

सितारों तुम तो सो जाओ!

परेशाँ रात सारी है सितारों तुम तो सो जाओ,
सुकूत-ए-मर्ग तारी है सितारों तुम तो सो जाओ|

क़तील शिफ़ाई

वो फ़लक कि जिसपे मिले थे हम!

तो ये किसलिए शबे-हिज्र के उसे हर सितारे में देखना,
वो फ़लक कि जिसपे मिले थे हम, कोई और था उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

धूप पहनकर निकलने लगते हैं!

हसीन लगते हैं जाड़ों में सुबह के मंज़र,
सितारे धूप पहनकर निकलने लगते हैं|

राहत इन्दौरी

उस किनारे सितारे भी फूल भी!

दरिया के उस किनारे सितारे भी फूल भी,
दरिया चढ़ा हुआ हो तो उस पार देखना |

निदा फ़ाज़ली

आंखों से लहू टपका !

आकाश के माथे पर तारों का चरागाँ है,
पहलू में मगर मेरे जख्मों का गुलिस्तां,
आंखों से लहू टपका दामन में बहार आई|

अली सरदार जाफ़री

मुँह मत लगाया करो!

चांद सूरज कहाँ, अपनी मंज़िल कहाँ,
ऐसे वैसों को मुँह मत लगाया करो|

राहत इन्दौरी