यार सबको बना लिया न करो!

अपने रुत्बे का कुछ लिहाज़ ‘मुनीर’,
यार सबको बना लिया न करो|

मुनीर नियाज़ी

जो शाहों को मिला करता है !

देर से आज मेरा सर है तेरे रानों पर,
ये वो रुत्बा है जो शाहों को मिला करता है |

क़तील शिफ़ाई