ज़रा देर को रुलाये मुझे!

बहुत दिनों से मैं इन पत्थरों में पत्थर हूँ,
कोई तो आए ज़रा देर को रुलाये मुझे|

बशीर बद्र

मिरी प्यास बुझाते जाते!

मैं तो जलते हुए सहराओं का इक पत्थर था,
तुम तो दरिया थे मिरी प्यास बुझाते जाते|

राहत इन्दौरी

मुझे निकाल के पत्थर बना दिया!

मुझसे मुझे निकाल के पत्थर बना दिया,
जब मैं नहीं रहा हूँ तो पूजा गया हूँ मैं|

निदा फ़ाज़ली

हम भी तो पत्थर के हो गये!

ऐ याद-ए-यार तुझ से करें क्या शिकायतें,
ऐ दर्द-ए-हिज्र हम भी तो पत्थर के हो गये|

अहमद फ़राज़

जो पत्थर हैं, फूल थे पहले!

दिल लगाने की भूल थे पहले,
अब जो पत्थर हैं, फूल थे पहले|

सूर्यभानु गुप्त

सन्नाटों में बोलनेवाला-

मेरे आंगन में आये या तेरे सर पर चोट लगे,
सन्नाटों में बोलनेवाला पत्थर अच्छा लगता है।

निदा फ़ाज़ली

दिल को दिल बनाने में!

हर धड़कते पत्थर को, लोग दिल समझते हैं,
उम्र बीत जाती है, दिल को दिल बनाने में|

बशीर बद्र

इक फूल देके आया था!

मैं जिसके हाथ में इक फूल देके आया था,
उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

पत्थर ज़रा भारी रखो!

ये हवाएं उड़ न जाएं ले के काग़ज़ का बदन,
दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो|

राहत इन्दौरी