वो काँच का पैकर है!

यूँ देखते रहना उसे अच्छा नहीं ‘मोहसिन’,
वो काँच का पैकर है तो पत्थर तिरी आँखें|

मोहसिन नक़वी

वो हीरा है वो माटी हो या कंकर हो!

जिस चीज़ से तुझ को निस्बत है जिस चीज़ की तुझ को चाहत है,
वो सोना है वो हीरा है वो माटी हो या कंकर हो|

इब्न ए इंशा

हाथ में नहीं है वो पत्थर तलाश कर!

नज़दीकियों में दूर का मंज़र तलाश कर,
जो हाथ में नहीं है वो पत्थर तलाश कर|

निदा फ़ाज़ली

ज़रा देर को रुलाये मुझे!

बहुत दिनों से मैं इन पत्थरों में पत्थर हूँ,
कोई तो आए ज़रा देर को रुलाये मुझे|

बशीर बद्र

मिरी प्यास बुझाते जाते!

मैं तो जलते हुए सहराओं का इक पत्थर था,
तुम तो दरिया थे मिरी प्यास बुझाते जाते|

राहत इन्दौरी

मुझे निकाल के पत्थर बना दिया!

मुझसे मुझे निकाल के पत्थर बना दिया,
जब मैं नहीं रहा हूँ तो पूजा गया हूँ मैं|

निदा फ़ाज़ली

हम भी तो पत्थर के हो गये!

ऐ याद-ए-यार तुझ से करें क्या शिकायतें,
ऐ दर्द-ए-हिज्र हम भी तो पत्थर के हो गये|

अहमद फ़राज़

जो पत्थर हैं, फूल थे पहले!

दिल लगाने की भूल थे पहले,
अब जो पत्थर हैं, फूल थे पहले|

सूर्यभानु गुप्त

सन्नाटों में बोलनेवाला-

मेरे आंगन में आये या तेरे सर पर चोट लगे,
सन्नाटों में बोलनेवाला पत्थर अच्छा लगता है।

निदा फ़ाज़ली