हज़ारों तरफ़ से निशाने लगे!

जहाँ पेड़ पर चार दाने लगे,
हज़ारों तरफ़ से निशाने लगे|

बशीर बद्र

पत्थरों तक अगर गया कोई!

मूरतें कुछ निकाल ही लाया,
पत्थरों तक अगर गया कोई|

सूर्यभानु गुप्त

हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ है!

आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूँ है,
ज़ख़्म हर सर पे, हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ है|

सुदर्शन फाक़िर

मचलती नाव पर पत्थर न फेंक!

फेंकने ही हैं अगर पत्थर तो पानी पर उछाल,
तैरती मछली, मचलती नाव पर पत्थर न फेंक|

कुंवर बेचैन