ऐब लगाया लोगों ने!

तेरी गली में आ निकले थे दोष हमारा इतना था,
पत्थर मारे, तोहमत बाँधी, ऐब लगाया लोगों ने|

कैफ़ भोपाली

जिसका मोहसिन कहलायेगा!

मैंने पूछा पहला पत्थर मुझ पर कौन उठायेगा,
आई इक आवाज़ कि तू जिसका मोहसिन कहलायेगा

क़तील शिफ़ाई