अपनी कहो अब तुम कैसे हो!

हमसे न पूछो हिज्र के क़िस्से,
अपनी कहो अब तुम कैसे हो|

मोहसिन नक़वी

ताबीर करके देखते हैं!

कहानियाँ ही सही सब मुबालग़े ही सही,
अगर वो ख़्वाब है ताबीर करके देखते हैं|

अहमद फ़राज़

इसे हर दिन फ़साने चाहिएँ!

तुम हक़ीक़त को लिए बैठे हो तो बैठे रहो,
ये ज़माना है इसे हर दिन फ़साने चाहिएँ|


राजेश रेड्डी

अपना ही फ़साना है!

जो उन पे गुज़रती है किसने उसे जाना है,
अपनी ही मुसीबत है अपना ही फ़साना है|

जिगर मुरादाबादी

जिसे जितना शुऊर था!

इस इक नज़र के बज़्म में क़िस्से बने हज़ार,
उतना समझ सका जिसे जितना शुऊर था|

आनंद नारायण ‘मुल्ला’

हक़ीक़त के हैं अफ़साने बहुत!

ये हक़ीक़त है कि मुझको प्यार है,
इस हक़ीक़त के हैं अफ़साने बहुत|

महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’