जिसे जितना शुऊर था!

इस इक नज़र के बज़्म में क़िस्से बने हज़ार,
उतना समझ सका जिसे जितना शुऊर था|

आनंद नारायण ‘मुल्ला’

हक़ीक़त के हैं अफ़साने बहुत!

ये हक़ीक़त है कि मुझको प्यार है,
इस हक़ीक़त के हैं अफ़साने बहुत|

महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’