तेज़ हवाएँ हैं बिखर जाओगे!

घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे,
हर तरफ़ तेज़ हवाएँ हैं बिखर जाओगे|

निदा फ़ाज़ली

किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है!

तूफ़ान का शेवा तो है कश्ती को डुबोना,
ख़ामोश किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है|

महेश चंद्र नक़्श

रात तूफ़ान से लड़े हैं पेड़!

उल्टे सीधे गिरे पड़े हैं पेड़,
रात तूफ़ान से लड़े हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त

तूफ़ान का रुख़ मोड़ देता है!

जहाँ दरिया कहीं अपने किनारे छोड़ देता है,
कोई उठता है और तूफ़ान का रुख़ मोड़ देता है|

वसीम बरेलवी

घरौंदे से ज़ोर-आज़माई क्या!

घास के घरौंदे से ज़ोर-आज़माई क्या,
आँधियाँ भी पगली है बर्क भी दिवानी है|

कैफ़ भोपाली

वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें!

कभी ग़म की आँधी, जिन्हें छू न पाए,
वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें|

सुदर्शन फ़ाकिर