दिल के धड़कने का गिला करता है!

मैं तो बैठा हूँ दबाये हुये तूफ़ानों को,
तू मेरे दिल के धड़कने का गिला करता है|

क़तील शिफ़ाई

अब रोज़ ही आ जाते हैं!

रोज़ बसते हैं कई शहर नए
रोज़ धरती में समा जाते हैं,
ज़लज़लों में थी ज़रा सी गर्मी
वो भी अब रोज़ ही आ जाते हैं|

कैफ़ी आज़मी

माँ दुआ करती हुई!

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है|

मुनव्वर राना