जो कही गई है मुझ से!

जो कही गई है मुझ से वो ज़माना कह रहा है,
कि फ़साना बन गई है मिरी बात टलते टलते|

कैफ़ी आज़मी

दुख फ़साना नहीं कि तुझसे कहें!

दुख फ़साना नहीं कि तुझसे कहें,
दिल भी माना नहीं कि तुझ से कहें|

अहमद फ़राज़

रात है नींद है कहानी है!

कुछ न पूछो ‘फ़िराक़’ अहद-ए-शबाब,
रात है नींद है कहानी है|

फ़िराक़ गोरखपुरी

बात ख़त्म हुई दास्तान बाक़ी है!

ज़रा सी बात जो फैली तो दास्तान बनी,
वो बात ख़त्म हुई दास्तान बाक़ी है|

जावेद अख़्तर

रोज़ कहें अफ़्साने लोग!

हम क्या जानें क़िस्सा क्या है हम ठहरे दीवाने लोग,
उस बस्ती के बाज़ारों में रोज़ कहें अफ़्साने लोग|

राही मासूम रज़ा

जो अश्क है आँखों में!

ये किसका तसव्वुर है ये किसका फ़साना है,
जो अश्क है आँखों में तस्बीह का दाना है|

जिगर मुरादाबादी

टूटे हुए पर बोलते हैं!

मेरी परवाज़ की सारी कहानी,
मेरे टूटे हुए पर बोलते हैं|

राजेश रेड्डी

पुराना खत खोला अनजाने में!

खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में,
एक पुराना खत खोला अनजाने में|

गुलज़ार