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जीवन प्रवाह- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘Stream Of Life’ का भावानुवाद-

 

 

 

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

 

जीवन प्रवाह 

 

 

जीवन का वही प्रवाह, जो मेरी धमनियों में दिन-रात बहता है,
वही पूरे विश्व में दौड़ता, और तालबद्ध तरीके से नृत्य करता है|

 

यही वह जीवन है जो, पृथ्वी की धूल के बीच, उल्लास के साथ उभरकर आता है
घास की असंख्य पत्तियों में
और फूल-पत्तियों के ऊपर-नीचे लहराने में अभिव्यक्त होता है|

 

यह वही जीवन, जीवन-और मृत्यु रूपी पालने झूलता है,
उतार में और बहाव में भी|

 

मैं महसूस करता हूँ कि मेरे अंग, जीवन के इस जगत  का स्पर्श पाकर गौरवशाली हो गए हैं|
                                                                                          और मेरा जीवन गौरवान्वित है, जीवन की उस युगों से चली आ रही धड़कन से ,                                                                                                                 जो इस क्षण मेरे रक्त में नर्तन कर रही है|

 

-रवींद्रनाथ ठाकुर

 

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-

 

Stream Of Life

 

The same stream of life that runs through my veins night and day
runs through the world and dances in rhythmic measures.
It is the same life that shoots in joy through the dust of the earth
in numberless blades of grass
and breaks into tumultuous waves of leaves and flowers.
It is the same life that is rocked in the ocean-cradle of birth
and of death, in ebb and in flow.
I feel my limbs are made glorious by the touch of this world of life.
And my pride is from the life-throb of ages dancing in my blood this moment.

 

– Rabindranath Tagore

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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