अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला!

दोस्त बनकर भी नहीं साथ निभाने वाला,
वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला|

अहमद फ़राज़

लहजा बदल के देखते हैं!

अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं,
‘फ़राज़’ अब ज़रा लहजा बदल के देखते हैं|

अहमद फ़राज़

ख़ुद पे कोई एहसान कर लिया है!

कुछ इस तरह गुज़ारा है ज़िंदगी को हमने,
जैसे कि ख़ुद पे कोई एहसान कर लिया है|

राजेश रेड्डी

ये अन्दाज़-ए-बयाँ मेरा!

पड़ेगा वक़्त जब मेरी दुआएँ काम आएंगी,
अभी कुछ तल्ख़ लगता है ये अन्दाज़-ए-बयाँ मेरा|

बेकल उत्साही

इस तरह का तमाशा किया न जाए!

लहजा बना के बात करें उनके सामने,
हमसे तो इस तरह का तमाशा किया न जाए|

जाँ निसार अख़्तर